खेलकूद की उम्र में समाजसेवा कर रही दस साल की मृदुला
ग्रेटर नोएडा (एसपी सिंह)। समाजसेवा की कोई उम्र नहीं होती, बस जज्बा और हौसला होना चाहिए। अधिकांश बच्चे टीचर, डॉक्टर, इंजीनियर इत्यादि बनने के सपने देखते हैं। वहीं, कुलेसरा गांव के सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली 10 साल की मृदुला राज समाजसेवा को ही अपना पेशा बनाना चाहती है। जिस उम्र में बच्चे खेलने के लिए खिलौनों की जिद करते हैं, उस आयु में सेक्टर पी-3 स्थित केंद्रीय विद्यालय की कक्षा 4 में पढ़ने वाली मृदुला ने अपने गुल्लक के पैसों से जरूरतमंद बच्चों को पाठ्य सामग्री के साथ कपडे़ व कोरोना से बचाव के उपकरण उपलब्ध करा रही हैं। 30 दिसंबर को अपने 10वें जन्मदिन पर मृदुला ने राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखकर अपनी गुल्लक के पैसों से कोरोना योद्धाओं के लिए 10 हजार मास्क देने की इच्छा जताई। जवाब में उन्हें जन्मदिन पर बधाई संदेश के साथ मास्क को स्थानीय प्रशासन को उपलब्ध कराने का पत्र प्राप्त हुआ। इसके बाद उसने गुल्लक से निकले करीब 13000 रुपये और परिजनों की मदद से मास्क खरीदकर उपजिलाधिकारी दिवाकर सिंह को उपलब्ध करा दिए।
पढ़ाई और खेलकूद में अव्वल
समाजसेवा के साथ मृदुला पढ़ाई और खेलकूद में भी अपनी कक्षा में अव्वल आती है। उसका कहना है कि पैसे से ही सब कुछ नहीं होता। मेरे पिता भोज राज दवाई की दुकान चलाते हैं और दादा टेलर हैं। इसके बाद भी मैं जितनी हो सकता है, जरूरतमंदों की उतनी मदद करने का प्रयास करती हूं। पिता भोज राज ने बताया कि इससे पहले 2018 में भी मृदुला को जन्मदिन पर प्रधानमंत्री कार्यालय से बधाई संदेश प्राप्त हुआ था। इसमें उसके सामाजिक कार्यों की सराहना की गई थी। मृदुला रोज पिता, चाचा और दादा से मिलने वाले पैसे गुल्लक में रख देती है। इतना ही नहीं, दादा से इस उम्र में ही सिलाई सीखकर मृदुला ने खुद 300 मास्क बनाकर कोरोना योद्धाओं को बाटें हैं। ज्यादातर मास्क उन्होंने तिरंगे के रंग में बनाए हैं। इसका उद्देश्य लोगों में देशभक्ति की भावना जगाना है। महिला दिवस पर मृदुला को सबसे छोटी समाजसेविका होने के लिए पुरस्कृत भी किया गया है।
4500 बच्चों को बांट चुकी है पाठ्य सामग्री
मृदुला के पिता भोज राज ने बताया कि 2013 से ही उसने गुल्लक में पैसे रखना शुरू कर दिया था। अपने 7वें जन्मदिन पर मृदुला ने गुल्लक तोड़ा तो 34600 रुपये निकले। इन पैसों से मृदुला ने कॉपी ,पेंसिल व पुस्तक खरीदकर सरकारी स्कूलों के जरूरतमंद बच्चों को देने की इच्छा जताई। पहले तो मुझे आश्चर्य हुआ, लेकिन फिर बेटी के फैसले से खुशी और गर्व भी हुआ। उन्होंने पैसों से पाठ्य सामग्री खरीदकर कुलेसरा, जलपुरा, तुस्याना आदि स्कूलों के 4500 बच्चों को दे दिया। उन्होंने बताया कि छोटी उम्र से ही मृदुला रोड पर कूड़ा बीनते बच्चों को देखकर उनके बारे में पूछती थी और मदद के लिए तत्पर रहती थी।
जरूरतमंदों को कंबल और गर्म कपड़े भी दिए
मृदुला स्कूलों में जाकर बच्चों को स्टेशनरी बांटती है। साथ ही वह बच्चों और उनके माता-पिता को शिक्षा, पर्यावरण और स्वच्छता के महत्व की जानकारी देेकर जागरूक भी करती है। वह पिता के साथ झुग्गियों में भी जरूरतमंद लोगों को कंबल और गर्म कपड़े बांटने जाती है। झुग्गियों में वह लोगों से उनके बच्चों को स्कूल भेजने का आग्रह करती है। लॉकडाउन में उसने जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करा रही रामराज रसोई को अपनी गुल्लक दान कर मिसाल पेश की थी।