उपराज्यपाल ने दी मंजूरी, संख्या बढ़कर हो जाएगी 31
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। घरेलू झगड़ों को सुलझाने के लिए राजधानी में दस और फैमिली कोर्ट बनेंगी। ऐसे में इनकी संख्या बढ़कर 31 हो जाएगी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को इसके लिए मंजूरी दी। इस संबंध में अक्टूबर, 2019 में प्रस्ताव लाया गया था। करीब चार साल के इंतजार के बाद मंजूरी दी गई है।
इनके बनने के बाद दिल्ली में करीब एक दशक से लंबित मामलों के निपटान में तेजी आएगी। इस मंजूरी के साथ ही इन कोर्ट के प्रमुख के रूप में 10 जजों के पद समेत 71 अन्य पदों का भी सृजन होगा, जिनमें रीडर, स्टेनो/सीनियर पीए, स्टेनो/पीए, अहलमद/जेए, सहायक अहलमद, नायब नज़ीर, अर्दली और स्टाफ कार ड्राइवर सहित अन्य शामिल हैं। फैमिली कोर्ट में लगभग 46 हजार मामले लंबित हैं। फैमिली कोर्ट साकेत के प्रधान न्यायाधीश के पास सबसे कम 1321 मामले लंबित हैं, जबकि फैमिली कोर्ट रोहिणी में सबसे अधिक 3654 मामले लंबित हैं। फैमिली कोर्ट द्वारका में प्रतिदिन औसत 150-200 मामले पंजीकृत होते हैं।