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टेप लगाने की जरूरत क्यों पड़ी: एक CCTV कैमरा पर लगाई टेप, दूसरे में कैद हुई करतूत, रिपोर्ट में खुलासा

Mon, 16 Sep 2024 09:32 PM IST
नोएडा ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा

सार

घटना से सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर टेप लगाने की जरूरत क्यों पड़ी। अस्पताल स्टाफ से जानकारी ली गई। तो उसमें इस बात का खुलासा हुआ है।
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सीसीटीवी कैमरे पर टेप लगाता स्टाफ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला अस्पताल में जहां मरीजों को सेवाएं दी जाती हैं, वहां होप सिस्टम में शासन के आदेश पर सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीजों को इलाज और दूसरी सुविधाएं किस तरह मिल रही हैं। ऐसे में कैमरे से छेड़छाड़ को शासन ने भी गंभीरता से लिया है।

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मरीजों के हित में लगाए सीसीटीवी कैमरे
अधिकारियों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में दूसरे तल पर मौजूद पैथोलॉजी विभाग में एक सर्जन लैब टेक्निशियन की सीसीटीवी कैमरे पर टेप लगाने में मदद करते नजर आ रहे हैं। पहले मरीज के बैठने के लिए स्टूल का उपयोग लैब टेक्निशियन ने किया, लेकिन जब सीसीटीवी कैमरे तक हाथ नहीं पहुंचा तो कुर्सी लाई गई।

इसके बाद उसे सहारा देने के लिए खुद सर्जन कुर्सी को पकड़ते दिख रहे हैं। इस बीच पैथोलॉजी विभाग के भी एक डॉक्टर गुजरते हुए दिखे हैं। ऐसे में संदेह यह भी है कि यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है। मामला सामने आने के बाद शासन से जिला अस्पताल की सीएमएस से सीसीटीवी फुटेज और दोनों डॉक्टरों के नाम मांग लिए।

अब शासन को भेजी गई रिपोर्ट में सीएमएस की तरफ से कहा गया है कि कैमरा अदृश्य हो जाए, इसलिए टेप लगाई गई, लेकिन पीछे लगे कैमरे ने इस करतूत को रिकॉर्ड कर लिया। दोनों ही कैमरों की फुटेज अब शासन को भेजी गई हैं। दोनों ही डॉक्टर ड्यूटी के समय अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं। सर्जन पर यह भी आरोप है कि इस वजह से उनकी सर्जरी नगण्य हैं।

जिला अस्पताल के एक सर्जन की ओर से सीसीटीवी कैमरे पर टेप लगाकर करतूत छिपाने का प्रयास करने का मामला सामने आया है। आरोपियों की हरकत पीछे लगे दूसरे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। इस संबंध में शासन की ओर से 21 मई 2024 की सीसीटीवी फुटेज और रिपोर्ट मांगने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
 
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शासन ने जो रिपोर्ट और फुटेज मांगी है। उनको शासन को भेज दिया गया है। शासन से मांग की गई है कि इसके लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और लैब टेक्निशियन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। - डॉ. रेनू अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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