सीबीआरआई देगा सुझाव तब होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज आरडब्ल्यूए की ओर से ट्विन टावर के नजदीकी टावरों की मजबूती की जांच के लिए स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की गई है। हालांकि, एडिफिस ने यूके की एक कंपनी से विस्फोट से होने वाले संभावित कंपन को लेकर एक रिपोर्ट तैयार कराई है। इसमें बताया गया है कि टावर गिरने के बाद अधिकतम कंपन 34एमएम प्रति सेकेंड की संभावना है। यहां की इमारतें भूकंप के जोन-5 के तहत 300 एमएम प्रति सेकेंड के कंपन के मानक को आधार बनाकर तैयार की गईं हैं। ऐसे में एडिफिस का कहना है कि स्ट्रक्चरल ऑडिट की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि, प्राधिकरण की ओर से दिए गए निर्देश के मुताबिक, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) जांच करने के बाद सलाह देगा। अगर सुझाव में ऑडिट कराने के लिए कहा जाता है तो इसे कराना होगा। इसके लिए सीबीआरआई को बिल्डर 70 लाख रुपये का भुगतान तीन दिन में करेगा।
कौन से स्थान होंगे खाली, एक सप्ताह में होगा तय
बैठक में बताया गया कि पुलिस व फायर विभाग और एडिफिस इंजीनियरिंग के लोग समन्वय स्थापित करते हुए एक सप्ताह में यह तय करेंगे कि कहां-कहां के स्थानों को अंतिम ब्लास्ट के दिन खाली कराया जाएगा। पहले 50 मीटर के दायरे के सभी टावरों को खाली कराने का फैसला किया गया था।
लोहे की चादर की ऊंचाई बढ़ेगी
विस्फोट के बाद मलबे और धूल को एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज परिसर में जाने से रोकने के लिए 30 मीटर ऊंची लोहे की चादर लगाई जा रही है। इसकी ऊंचाई और बढ़ाई जाएगी। इस बाबत 30 जुलाई तक ऊंचाई के निर्धारण पर फैसला हो जाएगा।
150 मीटर की दूरी पर होगा रिमोट
अंतिम ब्लास्ट के दिन 150 मीटर की दूरी पर रिमोट होगा। यहां छह वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे, जो विस्फोट के लिए रिमोट का बटन दबाएंगे। इमारत में विस्फोट के दौरान 30 मिनट तक के लिए आसपास की सभी सड़कों पर ट्रैफिक रोका जाएगा। एक्सप्रेसवे पर भी यह लागू होगा। ध्वस्तीकरण के बाद कितनी धूल उड़ेगी। इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। कुछ देर तक आसमान में धूल ही धूल रहेगी।