ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित श्मशान भूमि।
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ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन जल्द ही ग्रेनो वेस्ट में श्मशान की 880 वर्गमीटर जमीन से सुपरटेक बिल्डर का कब्जा हटाएगा। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की कोर्ट ने हाल ही में इस बाबत आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने वर्ष 2016 में तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा है। जिसमें बिल्डर पर 88 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए बिल्डर को जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था। वहीं इस संबंध में बिल्डर ने किसी तरह का पक्ष रखने से इनकार कर दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) चरणजीत नागर ने बताया कि पतवाड़ी गांव के खसरा नंबर 210 और 211 की 880 वर्गमीटर श्मशान भूमि है। सरकारी दस्तावेज में आज भी यह जमीन श्मशान भूमि के नाम पर दर्ज है। हालांकि इस पर सुपरटेक बिल्डर का कब्जा है। वर्ष 2016 में तहसीलदार दादरी के न्यायालय ने आदेश जारी कर बिल्डर को जमीन से बेदखल किया गया था। साथ ही 88 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था। बिल्डर ने तहसीलदार के आदेश को अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के न्यायालय में चुनौती दी थी। जिस पर तभी से सुनवाई चल रही थी। अब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की अदालत ने तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही बिल्डर की अपील खारिज कर दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दादरी तहसील को जमीन से कब्जा हटाने का आदेश दिया गया है।
इको विलेज वन प्रोजेक्ट में है जमीन
ग्रेनो वेस्ट में पतवाड़ी गांव में सुपरटेक बिल्डर का इको विलेज वन प्रोजेक्ट है। इसी प्रोजेक्ट के बीच श्मशान भूमि है। बिल्डर ने जमीन की बाउंड्रीवॉल कराई हुई है। इस जमीन के तीन तरफ टावर बने हैं। इनमें कुछ फ्लैटों में लोगों रहते हैं। वहीं एक तरफ निर्माणाधीन इमारत है। प्राधिकरण ने भी इस जमीन का आवंटन बिल्डर के नाम नहीं किया है। वहीं आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सोसाइटी के बीच में श्मशान भूमि होने से डर लगता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2014 से यहां किसी का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है।