-दावा, यह पहला मामला, जिसने पीडियाट्रिक सर्जरों में देश को नई ऊंचाई तक पहुंचाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल और मौलाना आजाद मेडिकल कालेज की विशेषज्ञ टीम ने देश में पहली बार तालु परजीवी जुड़वां (पैलेटल पैरासिटिक ट्विन) से ग्रस्त नवजात शिशु का सफल ऑपरेशन करने सफलता प्राप्त की है। दावा है कि यह देश में इस तरह का पहला केस है, जिसने बाल शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक सर्जरी) में देश को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है।
ऑपरेशन प्रो. डॉ. सुजाय नियोगी के नेतृत्व में टीम ने तीन घंटे से अधिक समय तक किया, जिसमें जटिल सर्जरी कर सफलता हासिल की। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएल चौधरी ने बताया कि यह टीम की विशेषज्ञता और सामूहिक प्रयास का परिणाम है। चिकित्सकों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड जांच में चिकित्सकों को शिशु के तालु से जुड़ी 115 x 12 x 8 सेंटीमीटर की बड़ी गांठ का पता चला। 36वें सप्ताह में सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हुई, क्योंकि यह गांठ उसके श्वसन मार्ग को अवरुद्ध कर रही थी। बच्चे की जान बचाने के लिए तत्काल इनट्यूबेशन कर ऑपरेशन किया गया।
चिकित्सकों ने बताया कि शिशु की जांच में पाया गया कि यह गांठ वास्तव में फीटस इन फीटू थी यानी एक अधूरा विकसित भ्रूण, जिसमें उपास्थि, आंत, यकृत और मस्तिष्क जैसी संरचनाएं मौजूद थीं। ऑपरेशन के बाद दो माह की निगरानी में शिशु पूरी तरह स्वस्थ हो गया और अब सामान्य रूप से दूध पी रहा है। वहीं, तालु परजीवी जुड़वां उसे कहते है, जो एक जुड़वां पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता और अपने विकसित जुड़वां से आंशिक रूप से जुड़ा रहता है।