जिले की एक मात्र बालिका आईटीआई में स्टाफ की कमी के चलते कई छात्राएं आईटीआई छोड़कर जा चुकी हैं। आईटीआई प्रबंधन के अनुसार पिछले साल के मुकाबले 33 छात्राएं कम हो गई हैं।
स्टाफ की कमी के कारण आईटीआई में पांच में से दो कोर्स बंद हो चुके हैं। शेष तीन कोर्सों का प्रशिक्षण देने के लिए आईटीआई में 14 में से दो कर्मचारी ही मौजूद हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का दावा भी धूमिल होता नजर आ रहा है। जब लड़कियों के प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं होगा तो लड़कियां कैसे आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बन पाएंगी।
जिले में बालिकाओं को रोजगार प्रदान करने एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्ष 2014 में रंगाला गांव में बालिका आईटीआई शुरू की गई थी। शुरुआत में बालिका आईटीआई में कंप्यूटर डिजाइन, ड्रेस मेकिंग, सिविंग टेक्नोलॉजी, बेसिक कॉस्मेटोलॉजी, कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग आदि पांच कोर्स शुरू किए गए थे जिनका प्रशिक्षण देने के लिए 14 पद स्वीकृति किए गए थे।
बालिका आईटीआई के प्रति लोगों का रुझान बढ़ने लगा और पिछले साल तक सभी कोर्सों का प्रशिक्षण लेने के लिए 60 लड़कियां मौजूद थीं। लेकिन 5 साल का समय गुजर जाने के बाद भी सरकार की ओर से बालिका आईटीआई में स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया गया। शुरू किए गए पांच कोर्सों का प्रशिक्षण देने के लिए 14 में से 2 कर्मचारी ही मौजूद हैं जिसके कारण लड़कियां आईटीआई आतीं और खाली बैठ कर घर लौटती रहीं।
प्रदेश आईटीआई विभाग की ओर से स्टाफ की कमी को पूरा करने के बजाए ड्रेस मेकिंग व कंप्यूटर डिजाइन के दो कोर्स बंद कर दिए गए। आज आईटीआई में तीन कोर्सों का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 27 लड़कियों को प्रशिक्षण देने के लिए सिर्फ दो कर्मचारी मौजूद हैं।
इस संबंध में बालिका आईटीआई की प्रमुख करुणा सैनी ने बताया कि आईटीआई में 27 लड़कियों को तीन कोर्सों का प्रशिक्षण देने के लिए 14 में से 2 कर्मचारी मौजूद हैं। स्टाफ की कमी के कारण 33 लड़कियां आईटीआई छोड़कर जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हर बैठक में विभाग के उच्चाधिकारियों से स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए गुहार लगाई जाती है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।