नोएडा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) द्वारा पारित एक आदेश के बाद नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने सोमवार को अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसके तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) क्रियाशील नहीं करने पर चार बिल्डरों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। 15 फरवरी तक एसटीपी क्रियाशील नहीं किए तो अधिभोग प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर पूर्व में शहर की विभिन्न सोसाइटी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की जांच की गई। इस दौरान 95 ग्रुप हाउसिंग में से सिर्फ 72 में ही एसटीपी क्रियाशील पाए गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में इनके सैंपल जांच को भेजे गए थे। इनमें से 55 सैंपल मानक के अनुरूप नहीं हैं। नोएडा प्राधिकरण द्वारा ऐसी सभी सोसाइटी को नोटिस भेजा गया था। अधिकारियों ने बताया कि इसके बावजूद अब तक कुछ सोसाइटी द्वारा अंडरटेकिंग नहीं दी गई।
एनजीटी ने आदेश दिया है कि ऐसी सोसाइटी के बिल्डरों के खिलाफ आईपीसी की धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। प्राधिकरण सीईओ ने ग्रुप हाउसिंग और नियोजन विभाग को निर्देशित किया है कि संबंधित सोसाइटी मेसर्स एसोटेक विंडसोर सेक्टर-78, स्काईटेक कंस्ट्रक्शन सेक्टर-76, गार्डेनिया इंडिया लिमिटेड सेक्टर-75 और फ्यूटेक शेल्टर्स सेक्टर-75 को 15 फरवरी तक एसटीपी क्रियाशील करने को निर्देशित करें। ऐसा नहीं होने पर नियोजन विभाग द्वारा उनका ओक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाणपत्र) निरस्त कर दिया जाएगा।