- मुठभेड़ में मारे गए जुबैर के पार्टनर वहाब के पांच साथी एसटीएफ की रडार पर
- संतकबीरनगर स्थित मकान में ताला बंद कर भागे वहाब के परिजन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पिपराइच के महुआचाफी गांव में 15 सितंबर को छात्र दीपक गुप्ता की हत्या ने गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक सभी को हिलाकर रख दिया है। ईंट से कूचकर की गई जघन्य वारदात के पीछे पशु तस्करों के नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद एसटीएफ कार्रवाई में जुटी है। एसटीएफ पशु तस्करों के नेटवर्क में सेंध लगाते हुए मेरठ से लेकर सिवान तक दबिश की कार्रवाई कर रही है।
दीपक हत्याकांड के मुख्य आरोपी रामपुर के शहर कोतवाली के मुहल्ला घेर मर्दान खां निवासी जुबैर उर्फ कालिया शुक्रवार रात पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वहीं कुशीनगर निवासी रहीम, गीडा के नौसड़ निवासी छाेटू, राजू और राम लाल को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भिजवा चुकी है। वहीं बिहार के गोपालगंज निवासी मन्नू सेठ ने बिहार कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं उसका पार्टनर कुशीनगर निवासी वहाब भागा हुआ है। उसकी पूरी गैंग पर शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है।
एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, जुबैर का खास पार्टनर वहाब लंबे समय से इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। उसकी भूमिका भी गहन जांच के दायरे में है। सूत्र बताते हैं कि वहाब के पांच खास साथी एसटीएफ की रडार पर हैं। इनमें से कुछ के तार बिहार के सिवान और गोपालगंज तक जुड़े हुए हैं, जबकि कुछ का कनेक्शन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ और बागपत तक फैला है। एसटीएफ ने इन सभी संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए टीम गठित कर दी है।
घर में ताला बंद कर वहाब के साथ परिजन भी भागे
वहाब का परिवार संतकबीरनगर स्थित मकान में रह रहा था। दीपक हत्याकांड के बाद से यहां ताला बंद है। आस-पड़ोस के लोग बताते हैं कि घटना के पर्दाफाश के बाद से ही वहाब के घरवाले मकान छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस को अंदेशा है कि परिवार के लोग भी भागे आरोपियों को छुपाने और उन्हें मदद पहुंचाने में भूमिका निभा सकते हैं। इस कारण उनकी गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।
एसटीएफ का पशु तस्करों के नेटवर्क पर फोकस
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता इस नेटवर्क को तोड़ना और इसमें शामिल हर चेहरे को बेनकाब करना है। जांच में सामने आया है कि जुबैर और वहाब जैसे लोग केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य और अंतरराज्यीय स्तर पर भी सक्रिय थे। पशु तस्करी के साथ-साथ इनके तार हथियारों की अवैध आपूर्ति और फर्जी दस्तावेजों के कारोबार से भी जुड़े पाए गए हैं।