कृषि कानूनों के समर्थन में किसानों का हल्ला बोल, पांच घंटे एक्सप्रेसवे जाम
नोएडा। कृषि कानूनों के समर्थन में किसान सेना, भारतीय कृषक समाज सहित कई संगठन एक साथ दिल्ली कूच के निकल पड़े। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों व कारों के साथ भारी संख्या में किसानों का काफिला महामाया फ्लाईओवर पहुंचा तो पुलिस ने बैरिकेड लगाकर अक्षरधाम मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता बंद कर दिया। इस पर किसानों ने जमकर हंगामा किया और सड़क पर ही बैठ गए। इसके बाद प्रधानमंत्री या कृषि मंत्री को ज्ञापन सौंपे जाने की जिद पर अड़े किसानों का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शाम 5 बजे दिल्ली रवाना किया गया, जिसके बाद रास्ते खोले गए। इस बीच करीब पांच घंटे तक एक्सप्रेसवे सहित नोएडा की अन्य सड़कें भीषण जाम से बेहाल रहीं। लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दोपहर एक बजे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और चारपहिया वाहनों में महामाया फ्लाईओवर के पास एकत्रित होने लगे। थोड़ी ही देर में किसानों की भीड़ बढ़ गई। इससे महामाया फ्लाईओवर के नीचे से अक्षरधाम की तरफ जाने वाला रास्ता बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया। भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर से किसान सेना की टोपियां लगाए कई लोग बैरिकेड से निकलकर पैदल ही अक्षरधाम की ओर चल पड़े। 100 मीटर दूर जाने पर पुलिस ने उन्हें वापस लौटा दिया। इससे किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। इस बीच एडीसीपी रणविजय सिंह ने किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरी शंकर से ज्ञापन देने के लिए कहा, लेकिन किसान नेता ने कहा कि ज्ञापन पुलिस को नहीं दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को ही ज्ञापन देंगे। किसान नेताओं ने दिल्ली जाकर ज्ञापन दिए बिना वापस लौटने से मना कर दिया। इस बीच सड़क पर ही प्रधानमंत्री व कृषि कानूनों के समर्थन में नारेबाजी होती रही। इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के दिल्ली की ओर आने वाले रास्ते पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। ट्रैफिक पुलिस ने एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह रूट डायवर्जन किया जिससे अन्य मार्गों पर भी जाम की समस्या बन गई। शाम करीब 5 बजे केंद्र सरकार की तरफ से बुलावा आने पर 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली भेजा गया।
‘सरकार को ब्लैकमेल कर रहे धरना देने वाले’
किसान सेना के नेता भगत सिंह ने कहा कि कांग्रेस शासन काल से किसानों की मांग थी कि मंडियां खत्म हों, आज सरकार ने इस मांग को माना है। किसानों के हित में सरकार ने जो काम किए हैं, उनकी कोई बात नहीं कर रहा है। मंडियों में बैठे आढ़ती कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, किसान नहीं। सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही है। अगर कृषि कानूनों को वापस लिया गया तो किसान चारों तरफ से दिल्ली को घेर लेंगे। किसान नेताओं ने कहा कि राष्ट्र को मोदी ने मजबूत किया है और किसान को योगी ने मजबूत किया है। किसी भी सूरत में कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने दिया जाएगा। भारतीय कृषक समाज के राष्ट्रीय महामंत्री हातम सिंह नागर ने कहा कि किसानों का सम्मान बढ़ा है। किसान के माल को खरीदने के लिए तीन आढ़ती आते थे, अब 300 व्यापारी आएंगे। किसानों की फसलें महंगे दाम में बिकेंगी।
एडीसीपी को ज्ञापन देकर वापस लौटी संघर्ष समिति
कृषि कानूनों के समर्थन में किसान संघर्ष समिति (नोएडा) के कार्यकर्ता भी भारी संख्या में पहुंचे हुए थे। समिति के महासचिव महेश अवाना ने एडीसीपी रणविजय सिंह को ज्ञापन दिया और कार्यकर्ताओं के साथ वापस लौट गए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नए कृषि कानूनों से किसानों को संपन्न बनाना चाहती है।