निवासी बोले- ऑडिट में निकली कमियों को जल्द किया जाए पूरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-78 स्थित सिक्का कार्मिक ग्रींस सोसाइटी की इमारत में रह रहे लोगों ने राहत की सांस ली है। स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट में सोसाइटी सुरक्षित घोषित हुई है। मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनएनआईटी) इलाहाबाद के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से किए गए ऑडिट में परियोजना की संरचनात्मक ढांचे को स्थिर और सुरक्षित बताया गया है।
नोएडा-सेक्टर-78 स्थित सिक्का कार्मिक ग्रींस सोसायटी में एमएनएनआईटी की सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. अनुपम रावत ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध डिजाइन डेटा, जोनिंग स्पेसिफिकेशंस और भारतीय मानकों के प्रासंगिक कोड के आधार पर पूरे ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का परीक्षण और सत्यापन किया गया। ऑडिट में स्पष्ट किया गया है कि बेसमेंट सहित सभी संबंधित संरचनाएं स्थिर पाई गई हैं। जरूरी मजबूती और छोटी-मोटी मरम्मत के बाद बिल्डिंग सुरक्षित, स्टेबल और रहने लायक है।
सिक्का ग्रुप के मीडिया प्रभारी का कहना है कि हमारे लिए निवासियों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। स्ट्रक्चरल ऑडिट में भवन को स्थिर और सुरक्षित पाया जाना हमारे लिए संतोष की बात है। रिपोर्ट में बताए गए सभी सुधार काम जल्द और तय मानकों के अनुसार पूरे किये जायेंगे। सोसाइटी में छह रिहायशी टावर हैं। 9 से 21 तल तक बने कुल 700 फ्लैटों में परिवार रहते हैं। पूरे प्रोजेक्ट का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 93,976.645 वर्ग मीटर है। रिपोर्ट में प्रत्येक ब्लॉक के भू-आवरण क्षेत्र और एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का भी विस्तृत विवरण दिया गया है। इसका ऑडिट डिजाइन डेटा के आधार पर किया गया।
प्राधिकरण से निवासी करेंगे खामियों को दूर करने की मांग
निवासियों का कहना है कि प्राधिकरण से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उसके आधार पर ऑडिट के दौरान जो खामियां सामने आई हैं, उन्हें समय रहते दुरुस्त कराने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए ताकि निवासियों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की आशंका न रहे।
अभी प्रमाण पत्र दिया है, डिटेल रिपोर्ट प्राधिकरण से प्राप्त करेंगे। इसके बाद शेष कमियों को दूर करने के लिए प्राधिकरण से जल्द समयबद्ध तरीके से कार्य करने की मांग की जाएगी। -
किशोर कुनाल, निवासी
जो भी खामियां हैं उसे दूर किया जाए, वह दूर हुईं, इस बात का प्रमाण भी एमएनएनआईटी जब दे दे, उसके बाद फिर स्ट्रक्चरल ऑडिट हो। इसके बाद ही निवासियों को राहत मिल सकती है।
-मोहन चंद्र अग्रवाल
ऋषभ कौशल