उन्होंने मूक बधिरों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के साथ बातचीत के बाद सिग्निफाई डिवाइस बनाई। यह उपकरण गूंगे-बहरे लोगों के लिए विकसित किया गया है। हर्ष ने बताया कि सिग्निफाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं मशीन लर्निंग (एमएल) तकनीक का प्रयोग किया गया है। यह यूजर साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) को ऑडियो में बदल सामने वाले व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाता है।
यह डिवाइस न केवल साइन लैंग्वेज को ऑडियो में बदलता है बल्कि यह संवाद की बाधाओं को दूर कर दिव्यांगों को सामाजिक संवाद में सक्रिय भागीदार बनाने में मदद करता है। सिग्निफाई के लिए हर्ष को एकेटीयू इनोवेशन अवार्ड भी मिला है।
बेस्ट स्टार्टअप अवॉर्ड जीता
हर्ष ने बताया कि डिवाइस के निर्माण के लिए उन्होंने 2.5 लाख रुपये का निवेश किया। एक उपकरण बनाने की लागत लगभग 15,000 रुपये है। उन्होंने कहा कि सिग्निफाई का थोक उत्पादन शुरू करने के बाद इसकी कीमत 5,000 रुपये प्रति यूनिट तक कम हो सकती है।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी डिवाइस देश में अभी तक नहीं बनी है। उन्होंने पेटेंट लेने के लिए आवेदन कर दिया है। हाल ही में उन्हें राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बेस्ट स्टार्टअप अवॉर्ड से नवाजा है।