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Noida News: ग्रंट 12 में शारदा का कहर, नदी में समा गए पांच पक्के मकान

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सिंघिया में कटे मकान को देखते परिजन व लेखपाल राकेश शुक्ला।संवाद
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निघासन। शारदा नदी इन दिनों ग्रंट 12 गांव के लिए काल बनी हुई है। कटान ने ग्रामीणों को सड़कों पर ला खड़ा कर दिया है। रविवार सुबह नदी की तेज धारा में निर्मला, धीरज, सुमित्रा देवी, विपिन कुमार और राधेश्याम के पक्के मकान बह गए।
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ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक 117 घर नदी में समा चुके हैं। दर्जनों बीघा उपजाऊ जमीन और मवेशी भी नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। रोजाना कई घर बहने से ग्रामीण दहशत में हैं। लोग बेघर होकर खुले आसमान तले रात गुजारने को मजबूर हैं।
कटान पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन मुआवजे की रकम देकर उनके जख्मों पर नमक छिड़क रहा है। उनका कहना है कि असली राहत तब मिलेगी जब सुरक्षित स्थान पर स्थायी पुनर्वास कराया जाय।
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इस बाबत तहसीलदार मुकेश वर्मा ने बताया कि जलस्तर घटने के साथ ही शारदा का कटान तेज हो गया है। प्रशासन पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था कराएगा।


शारदा नदी में समा रहा सिंघिया गांव
- एक ही दिन में नदी में समाए 11 घर, अब सिर्फ 53 घर बचे

संवाद न्यूज एजेंसी
बिजुआ। विकास खंड बिजुआ का सिंघिया गांव शारदा नदी की कटान से विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। गांव में 2024 में कुल 119 घर थे। पिछले साल 25 घर कटान की चपेट में आ गए। इस साल सितंबर से शुरू हुए कटान में अब तक 41 और घर नदी में समा चुके हैं।

21 सितंबर को एक ही दिन में 11 मकान, सड़कें और कई बिजली के खंभे नदी में बह गए। जिन परिवारों के घर नदी में समा गए उनमें रामनरायन, दारासिंह, लल्लन, महेश कुमार, प्रमोद कुमार, भृगुनाथ, रामप्रवेश, नीरज कुमार, गौरीशंकर, गनेश और हरेराम के नाम शामिल हैं। यह लोग सड़क किनारे तिरपाल डालकर अपने बच्चों और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं।
बेघर हुए परिवारों की स्थिति दयनीय है। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। छोटे बच्चों के लिए दूध और दवाओं की कमी है। मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम करना भी चुनौती बन गया है। पीने के पानी की किल्लत पैदा हो गई है।
बिजली के खंभे और तार नदी में बह जाने से गांव में अंधेरा छाया हुआ है। ग्रामीणों को जंगली जानवरों के हमले का भी डर सता रहा है। क्षेत्रीय लेखपाल राकेश शुक्ल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और तहसील प्रशासन को नियमित रूप से जानकारी दे रहे हैं।

सिंघिया में कटे मकान को देखते परिजन व लेखपाल राकेश शुक्ला।संवाद

सिंघिया में कटे मकान को देखते परिजन व लेखपाल राकेश शुक्ला।संवाद

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