फतेहाबाद के बीघड़ क्षेत्र में दिल्ली कमेटी की स्कूल की संपत्ति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की संपत्तियों के रखरखाव और नीलामी को लेकर अकाली नेता परमजीत सिंह सरना-मनजीत सिंह जीके और वर्तमान कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका आमने-सामने आ गए हैं। फतेहाबाद के बीघड़ क्षेत्र में दिल्ली कमेटी की स्कूल की संपत्ति को लेकर दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
कमेटी के पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना और मनजीत सिंह जीके ने आरोप लगाया कि बीघड़ की 283 एकड़ जमीन की उपेक्षा की जा रही है। वहां स्कूल की नींव 1996 में जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा ने रखी थी, जिसमें 900 से अधिक बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब स्कूल और कॉलेज की इमारत खंडहर बन चुकी है। करोड़ों जमीन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में नीलामी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मौजूदा प्रबंधक कौम की संपत्ति के हितों की रक्षा की जगह उसे नीलाम कराने की जल्दी में हैं। जीके ने भी कमेटी पर कोर्ट में भ्रामक जानकारी देने और विपक्षी नेताओं के बारे में गलत जानकारी देकर न्यायपालिका को गुमराह करने का आरोप लगाया।
वहीं, दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने प्रेसवार्ता कर सरना के आरोपों को झूठा व भ्रामक बताया। उन्होंने सरना पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्कूल परिसर में चौकीदार से बदसलूकी व कमेटी के शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधिकारियों के साथ जबरन कब्जा करने की कोशिश की। कालका ने कहा कि सरना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और कमेटी को बदनाम करने के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल खोलने का मकसद सरना का करीबियों को लाभ पहुंचाना था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर संगत को गुमराह करने, गुरुद्वारा संपत्तियों के राजनीतिक उपयोग व निजी हित साधने के गंभीर आरोप लगाए हैं।