अस्पताल में आयोजित हुए कार्यक्र में बताए गए योग के फायदे
चिकित्सा पद्धति में योग को एकीकृत करने पर किया ध्यान केंद्रित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अब सफदरजंग अस्पताल मरीजों का इलाज करने के साथ ही योग के गुरु भी सिखाएगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर अस्पताल ने आयुष मंत्रालय के साथ विशेष प्रयास शुरू किया है। इसके तहत योग नेचुरोपैथी ओपीडी में अस्पताल की चिकित्सा पद्धति में योग को एकीकृत करने पर कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें ज्ञान के आदान-प्रदान, सहयोगी संवाद और अनुभवात्मक शिक्षा पर चर्चा हुई। कार्यशाला में स्वास्थ्य देखभाल, तनाव प्रबंधन में योग की भूमिका, सहयोगी अनुसंधान के अवसर, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के लिए स्वस्थ जीवन शैली अभ्यास और कार्यस्थल तनाव प्रबंधन के लिए योग पर चर्चा हुई।
इस दौरान अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. (प्रो.) संदीप बंसल ने कहा कि हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में योग को शामिल करने से तनाव संबंधी बीमारियों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के लिए स्थायी और प्रभावी समाधान मिल सकता है। यह पहल हमारी चिकित्सा पद्धति को अधिक एकीकृत बनाने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने योग के 8 घटकों पर जोर दिया। इसमें यम (नैतिक मानक), नियम (आत्म-अनुशासन), आसन (शारीरिक मुद्राएं), प्राणायाम (सांस पर नियंत्रण), प्रत्याहार (संवेदी वापसी), धारणा (एकाग्रता), ध्यान (ध्यान) और समाधि (ज्ञान/आनंद) शामिल हैं। वहीं, इस मौके पर आयुष मंत्रालय के सीसीआरवाईएन के निदेशक डॉ. राघवेंद्र राव ने कहा कि हमारा उद्देश्य रोगियों और देखभाल करने वालों दोनों के शारीरिक, भावनात्मक व मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इस मौके पर अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी अरोड़ा, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की वरिष्ठ सलाहकार चिकित्सक डॉ. सुजाता जॉर्ज सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।