ड्राई फ्रूटॅस खरीदकर देशभर के एक हजार से अधिक लोगों से 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले दुबई ड्राई फ्रूट्स कंपनी के प्रमोटर मोहित गोयल और एमडी ओमप्रकाश जांगिड़ को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
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मोहित गोयल पूर्व में रिंगिंग बेल कंपनी बनाकर 251 रुपये में एंड्रॉयड मोबाइल बेचने के नाम पर भी लोगों से ठगी के आरोप में जेल जा चुका है। इन आरोपियों ने नोएडा व गुरुग्राम में चार अलग अलग नामों से फर्जी कंपनी बनाकर विभिन्न फर्म से ड्राई फ्रूट्स खरीदे और उनके पैसे नहीं दिए।
इस मामले में अभी 12 आरोपी फरार हैं। ये लोग इस साल नोएडा में कंपनी बनाकर ठगी कर रहे थे। इनके खिलाफ कोतवाली सेक्टर-58 में मुकदमा दर्ज है। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था लव कुमार ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस की टीम ने रविवार शाम को सेक्टर-50 से मेघदूतम अपार्टमेंट निवासी मोहित गोयल और जयपुर निवासी ओमप्रकाश जांगिड़ को गिरफ्तार कर लिया।
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इन लोगों ने सेक्टर-62 के कोरेंथम बिल्डिंग में दुबई ड्राई फ्रूट्स नाम से एक फर्जी कंपनी खोल रखी थी। ओमप्रकाश इस कंपनी का एमडी और मोहित इसका प्रोमोटर था। यह लोग देशभर की विभिन्न फर्मों से संपर्क कर उनसे ड्राई फ्रूट्स, दाल, तेल, मसाले खरीदते थे। फर्म संचालकों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें कुछ राशि एडवांस के रूप में दे देते थे। बाद में उनसे लाखों रुपये के ड्राई फ्रूट्स या अन्य सामान लेकर पैसे नहीं देते थे।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपियों ने नोएडा व गुरुग्राम में चार फर्जी कंपनियां बनाकर देशभर के करीब एक हजार से अधिक लोगों से 200 करोड़ से अधिक की ठगी की है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा करीब पांच सौ करोड़ रुपये तक का हो सकता है।
सेक्टर-62 के कोरेंथम बिल्डिंग से चलने वाली दुबई ड्राई फ्रूट्स एंड स्पाइस हब के 14 अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ रोहित मोहन नामक एक कारोबारी ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि इस कंपनी के लोगों ने फर्जी तरीके से कंपनी बनाया और दूसरे फर्म के लोगों से संपर्क कर ड्राई फ्रूट्स खरीदे। इसके बाद करोड़ों का ड्राईफ्रूट्स लेकर बगैर पेमेंट दिए फरार हो गए।
ये हैं बादाम गैंग के सफेदपोश
इस मामले में पीड़ितों ने ने 20 अक्टूबर को कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस से शिकायत की थी। जांच के बाद इस मामले में 24 दिसंबर को पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने मोहित गोयल, सुमित यादव, मुसर्फिल लश्कर, विजय, नायरा सिंह उर्फ नील कमल, उज्जवल डे, स्वाति डे, सीए गौरव, राजीव कुमार, रुपेश कुमार ठाकुर, ओमप्रकाश जांगिड़, एवीपी नायरा व स्वाति समेत 14 लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया है।
फैमिली ऑफ ड्राई फ्रूट्स से लेकर दुबई ड्राई फ्रूट्स तक
यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2017 से शुरू हुआ और मोहित गोयल ने पर्दे के पीछे चलाना शुरू किया। हर कंपनी के साथ प्रोपराइटर व एमडी का चेहरा बदलता रहा। ऑफिस का स्थान भी बदलता रहा। अपर पुलिस आयुक्त लव कुमार ने बताया कि वर्ष 2017 में मोहित ने अपने दोस्त मनोज कादियान के साथ गुरुग्राम में फैमिली ऑफ ड्राई फ्रूट्स के नाम से कंपनी शुरू की। करोड़ों की ठगी करने के बाद इनके खिलाफ बरेली में मामला दर्ज हुआ और मनोज गिरफ्तार हुआ।
वर्ष 2018 में मोहित ने जयपुर निवासी प्रदीप निर्वाण के साथ मिलकर श्री श्याम ट्रेडर्स के नाम से फर्जी कंपनी खोली और ठगी के बाद इस कंपनी के खिलाफ नोएडा व गुरुग्राम में आठ मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2019 में आरोपियों ने नोएडा के सेक्टर-63 में आयुर्वेदिक कमोडिटीज के नाम से कंपनी खोली और यहां भी करोड़ों रुपये की ठगी की।
इस कंपनी में मोहित ने अपने दोस्त सुमित (इस मामले का आरोपी) के नौकर सोनेलाल को प्रोपराइटर बनाया था। इस कंपनी के खिलाफ भी नोएडा में मामला दर्ज है। वर्ष 2010 जनवरी में मोहित ने सेक्टर-62 कोरेंथम बिल्डिंग में दुबई ड्राईफ्रूट्स नाम की कंपनी खोली। इस कंपनी का एमडी जयपुर निवासी ओमप्रकाश जांगिड़ को बनाया गया था। इस कंपनी के खिलाफ कोतवाली सेक्टर-58 में दो मामले दर्ज किए गए। इसके बाद मोहित गोयल व ओमप्रकाश को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया।
पर्दे के पीछे मोहित व उसके पांच साथी
पुलिस जांच में पता चला है कि मोहित गोयल इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। पर्दे के पीछे सब वहीं करता था। उसने ड्राई फ्रूट्स की चार कंपनियां बनाई। सभी में मोहित के साथ समित यादव, मुसर्फिल लश्कर उर्फ राजीव कुमार, विजय कुमार, नायरा सिंह व रूपेश साथ रहे। सुमित इनका कैश, कानूनी और अन्य तरह का काम देखता था। विजय कुमार हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर रह चुका है। मुसर्फिल लश्कर, नायरा, रूपेश आदि फर्म के लोगों से बातचीत करता था।
पुलिस जांच में पता चला कि सेक्टर-62 के कोरेंथम बिल्डिंग में चलने वाली कंपनी दफ्तर का किराया तीन लाख रुपये प्रति माह था। ऑफिस विदेशी स्टाइल में सजा हुआ था। यहां तीन विदेशी महिलाएं रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थी। इस ऑफिस में कुल 56 लोगों का स्टाफ था। कुछ स्टाफ की सैलरी पांच से आठ लाख रुपये महीने तक की थी। विदेशी रिसेप्शनिस्ट को इस लिए रखा जाता था, जिससे जो भी फर्म के लोग यहां निवेश करने आए तो उन्हें लगे कि यहां बहुराष्ट्रीय कंपनी की तर्ज पर काम होता है। जांच में पता चला कि नोएडा ऑफिस का हर महीने का खर्च 40 लाख से अधिक का था।
देशभर के हजारों लोगों से सैकड़ों करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का नोएडा
पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की टीम ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड सुमित गोयल समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। - लव कुमार, अपर पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था