कृषि कानूनों के विरोध में 37 दिनों से चिल्ला बॉर्डर पर डटे किसानों का जोश कम नहीं हुआ है। किसान रोजाना अलग-अलग तरीकों से सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। बुधवार को किसानों ने धरना स्थल के नजदीक पार्क में सांकेतिक खेती कर सरकार को चेतावनी दी।
किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार का रुख नहीं बदला, तो किसान धरना स्थल को ही खेत बनाकर फसलों की बुआई शुरू कर देंगे। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के प्रदेश महामंत्री बीसी प्रधान ने कहा कि सरकार तारीख पर तारीख दे रही है। कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है।
सरकार अपनी बात पर अड़ी हुई है। अब किसान भी अपनी मांगें मनवाकर ही दिल्ली की सीमाओं से वापस लौटेंगे। आंदोलन ज्यादा लंबा चला तो किसान अपनी जरूरत के लिए धरना स्थल पर ही सब्जियों की खेती शुरू कर देंगे।
जिलाध्यक्ष राजीव नागर ने कहा कि पार्क के एक हिस्से में धनिया की बुआई करके किसानों ने आने वाले दिनों में आंदोलन को तेज करने का संकेत सरकार को दिया है। सरकार ने अगर कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया तो पूरे पार्क पर ही ट्रैक्टरों के जरिये सब्जियों की फसलों की बुआई की जाएगी।
पार्क ही नहीं धरना स्थल को भी खेत में तब्दील कर दिया जाएगा। इस मौके पर भाकियू भानु के राष्ट्रीय महासचिव बेगराज गुर्जर, प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. तरुण शर्मा आदि किसान नेताओं ने फावड़े, खुरपी आदि से मिट्टी खोदकर धनिये की बुआई की।
‘इतनी ताकत भ्रष्टाचार को रोकने में लगाते’
किसानों को उनके जिलों में ही रोके जाने और नजरबंद किए जाने से नाराज भानु गुट के प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों को धरना स्थल पर नहीं आने दिया जा रहा है। किसानों को रोकने के लिए पुलिस अभियान चला रही है, जिसे ऑपरेशन देहात नाम दिया गया है।
जितनी ताकत मुख्यमंत्री किसानों को रोकने में लगा रहे हैं, उतनी भ्रष्टाचार को रोकने में लगाते तो मुरादनगर जैसा हादसा नहीं होता। प्रदेश अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश के किसानों से पुलिस की पाबंदियों के बीच धरना स्थल पर पहुंचने का आह्वान किया।