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Noida News: उद्यमियों को राहत, किसानों को इंतजार

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-नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड में उद्यमियों, किसानों की मांगों पर गए प्रस्ताव को भी मिली मंजूरी
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नोएडा। नोएडा प्राधिकरण ने बोर्ड में किसानों, उद्यमियों की मांग पर भी प्रस्ताव रखे थे, जिनको मंजूरी मिली। उद्यमी यूनिफाइड पॉलिसी में कुछ नियमों में संशोधन की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। वहीं किसानों की मांग उनके गांव की आबादी से लगी हुई जमीन पर प्लॉट की थी। इन दोनों प्रस्ताव को बोर्ड से मंजूरी मिली। इसके साथ ही सेक्टर-74 सुपरटेक केपटाउन सोसाइटी में सह-विकासकर्ता की मंजूरी भी प्राधिकरण ने बोर्ड से ली।
ट्रांसफर चार्ज घटने से रक्त संबंध परिभाषा तक उद्यमियों को राहत
जिले के तीनों प्राधिकरण में भवन नियमावली एक करने के लिए फरवरी-2025 से प्रभावी यूनिफाइड पॉलिसी में औद्योगिक प्लॉट व इकाइयों से जुड़े हुए नियमों में कुछ बदलाव पर प्राधिकरण ने बोर्ड से मंजूरी ली है। इन बदलाव का सीधा फायदा और राहत उद्यमियों को निर्माण से लेकर संपत्ति ट्रांसफर करने तक में मिलेगी। इसको लेकर उद्यमियों के संगठन लंबे समय से मांग उठा रहे थे। प्राधिकरण की तरफ से अब तक 11 हजार 98 से ज्यादा औद्योगिक प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं।
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ट्रांसफर चार्ज 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। यूनिफाइड पॉलिसी प्रभावी होने से पहले यह धनराशि 4 प्रतिशत थी। ट्रांसफर चार्ज प्राधिकरण से आवंटित संपत्ति खरीदने पर नामांतरण को देना होता है।
-औद्योगिक इकाई को क्रियाशील करने के लिए एक वर्ष का और समय अब उद्यमियों को मिलेगा। प्रभावी व्यवस्था में 20 हजार वर्ग मीटर के प्लॉट पर 3 और इससे बड़े प्लॉट पर इकाई क्रियाशील करने के लिए प्लॉट आवंटन के बाद 5 वर्ष का समय प्राधिकरण देता है। इसके बाद दो वर्ष का और समय सशुल्क दिए जाने की व्यवस्था थी। इसमें पहले वर्ष के लिए प्लॉट की कीमत का 4 प्रतिशत वहीं दूसरे वर्ष 6 प्रतिशत शुल्क लगता था। अब तीन वर्ष का समय दिया जाएगा। इसमें पहले वर्ष प्लॉट कीमत का 3 दूसरे वर्ष 5 और तीसरे वर्ष 7 प्रतिशत शुल्क देना होगा।

-औद्योगिक इकाई संचालन को बनी कंपनी में अंशधारिता परिवर्तन (सीआईएस) की सूचना 90 दिन में देनी होती है। इस अवधि में न देने पर प्रतिदिन का विलंब शुल्क 500 रुपये प्रभावी है। इसे घटाकर 300 करने की मंजूरी बोर्ड से प्राधिकरण को मिली है।
-रक्त संबंधों में संपत्ति ट्रांसफर करने पर शुल्क नहीं लगता है। इसलिए रक्त संबंधों के रिश्तों में प्राधिकरण ने उप्र शासन के स्टांप और रजिस्ट्रेशन की अधिसूचना को प्रभावी करेगा। इसमें पुत्र, पुत्री, पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्र-वधू, सगा भाई, सगे भाई के मृतक होने की दशा में उसकी पत्नी, सगी बहन, दामाद, पौत्र-पौत्री, नाती-नातिन शामिल होंगे।
सुपरटेक केपटाउन सोसाइटी में फ्लैट रजिस्ट्री और निर्माण पूरा होने का रास्ता खुला
सेक्टर-74 सुपरटेक केपटाउन परियोजना को पूरा कराने के लिए को-डेवलपर को मंजूरी दी गई। अब अधूरे टावर बन सकेंगे और 646 फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री भी हो सकेगी। यह मंजूरी मैसर्स ब्रिकबॉस इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड के लिए दी गई है। प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि 3130 पॉइंट 97 वर्ग मीटर में यह परियोजना है। इसमें कुल 7 टावर हैं जिनमें से 2 टावर के लिए अधिभोग प्रमाण पत्र (ओसी) पहले ही जारी हो चुका है। अब काम पूरा होने के बाद बाकी 5 टावर के लिए अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। टावरों में अभी कई तल बनने बाकी हैं। जो टावर बन चुके हैं उनमें फिनिशिंग समेत अन्य काम बाकी हैं। यहां पर कुल 846 फ्लैट बनने प्रस्तावित हैं या बन चुके हैं। इनमें से 200 फ्लैट की रजिस्ट्री हो गई है। बाकी अब 646 फ्लैट की रजिस्ट्री की उम्मीद जग गई है। अधिकारियों ने बताया कि नए बिल्डर को प्राधिकरण के बकाया 130 करोड़ रुपये प्राथमिकता पर चुकाने होंगे। इस प्लॉट का वर्ष 2017 में सबडिवीजन हो गया था। कुछ समय पहले ही परियोजना दिवाला प्रक्रिया से बाहर आई है।


किसानों को आबादी से नजदीक भू-उपयोग प्लॉट के प्रस्ताव को सशर्त मंजूरी

प्राधिकरण ने किसानों के लिए गांव से लगी हुई किसी भी भू-उपयोग की जमीन पर किसान की तरफ से दी गई जमीन के सापेक्ष 5 प्रतिशत के प्लॉट देने का प्रस्ताव बोर्ड में रखा था। इसे कुछ शर्तों के साथ प्राधिकरण ने मंजूरी दी। शर्तें यह हैं कि इसको लेकर जन सामान्य से आपत्ति सुझाव लिए जाएंगे। फिर प्रकरण को मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा। इस तरह से किसानों को अभी इस मंजूरी के लाभ के लिए इंतजार करना होगा। प्रस्ताव में यह तर्क दिया गया कि ऐसा होने से जमीन देने वाले किसानों को प्लॉट देने में आसानी होगी।


बोर्ड ने कहा कि बकाया वसूली के लिए डिफाल्टर बिल्डरों पर सख्ती करे प्राधिकरण

बोर्ड बैठक में बिल्डर-खरीदारों से जुड़ी अमिताभकांत समिति की सिफारिशों पर आई जीरो पीरियड पॉलिसी की स्टेटस रिपोर्ट रखी गई। इसमें जानकारी दी गई कि अब तक बिल्डरों ने 913 करोड़ रुपये जमा किए हैं और 4931 फ्लैट की रजिस्ट्री हो चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि 36 परियोजनाओं के बिल्डर बकाया जमा नहीं करने की वजह से डिफाल्टर हैं। बोर्ड ने निर्देश दिया कि बकाया जमा नहीं करने वाले बिल्डरों पर सख्ती बरतते हुए फ्लैटों की रजिस्ट्री की संख्या में तेजी लाई जाए। इसके अलावा सेक्टर-23 में स्थित टकसाल परिसर में भारत सरकार के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए 126 आवासीय इकाई बनाई जा रही हैं। इसके लिए समयवृद्धि को मंजूरी देते हुए 2 करोड़ 51 लाख 32 हजार 401 रुपये शुल्क को एकमुश्त समाधान के रूप में माफ करने को मंजूरी दी गई।
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स्पोर्ट्स सिटी में जमीन से जुड़ा हुआ यह निर्णय-

स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं सेक्टर-78-79, 150 में प्लॉट-1 व 152 में अनअधिगृहित जमीन को लेकर भी बोर्ड में चर्चा हुई। अधिकारियों के मुताबिक यह निर्णय लिया गया है कि परियोजनाओं में छोटे-छोटे टुकड़ों में बची जमीन को किसानों से आपसी सहमति से ली जाएगी। इसके लिए डेडलाइन 31 दिसंबर 2026 तय की गई है। इसके साथ ही लेआउट में शामिल अन्य जमीन प्राधिकरण किसानों से लेगा। प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने बताया कि यह जमीन मौजूदा दरों पर ही बिल्डरों को देगा।
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