-फेसटाइम के जरिए बयान दर्ज कराने की मांग खारिज, करना होगा सरेंडर
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। रंगदारी और आपराधिक मामलों में आरोपी स्क्रैप कारोबारी रवि काना को बड़ा झटका लगा है। जिला अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने आदेश में कहा कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का पालन नहीं किया। पुलिस जांच से लगातार बचता रहा और विवेचना में बाधा उत्पन्न की। फैसले के बाद उसे अब आत्मसमर्पण करना होगा।
अदालत ने कहा कि जांच में पूरा सहयोग और पुलिस के समक्ष उपस्थित की शर्त पर उसे फरवरी में अग्रिम जमानत प्रदान की गई थी, लेकिन रिपोर्ट में पाया गया कि आरोपी ने बार-बार जांच अधिकारी के सामने पेश होने से परहेज किया। सत्र अदालत ने कहा कि फेसटाइम के माध्यम से बयान दर्ज कराने की उसकी मांग जांच प्रक्रिया से बचने का प्रयास है। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी लुकाछिपी का खेल खेल रहा था और भूमिगत रहकर जांच को प्रभावित कर रहा था।
14 जनवरी को दर्ज की गई थी प्राथमिकी
सेक्टर-63 थाने में 14 जनवरी को शैलेंद्र शर्मा की शिकायत पर रवि काना के खिलाफ बीएनएस की धारा-351 (आपराधिक धमकी), धारा-308 (जबरन वसूली) तथा धारा-3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके अलावा उस पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है।
मामले की जांच के दौरान अदालत ने पाया कि 29 जनवरी को रवि काना की पेशी के लिए बी-वारंट जारी किया गया था। उस समय वह एक अन्य मामले में जेल में बंद था। हालांकि, बाद में उसे बिना किसी न्यायालयी आदेश के जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद उसने 11 फरवरी को अग्रिम जमानत हासिल कर ली।
पुलिस ने 14 फरवरी को ही जमानत निरस्त करने के लिए अदालत में आवेदन दाखिल कर दिया था। इसके बाद रवि काना ने अपनी जान को खतरा बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल को उसे सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए थे। बाद में ट्रायल कोर्ट ने भी अपनी पहले की कुछ शर्तों में नरमी बरतते हुए उसे अपनी सुविधानुसार निर्धारित तारीख पर पुलिस के समक्ष उपस्थित होने की छूट दी थी। इसके बावजूद वह जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुआ।