छनौरा बाजार की रामलीला में मंचन करते कलाकार। संवाद
सुरियावां। आदर्श रामलीला समिति हरीपुर अभियां की रामलीला में बृहस्पतिवार को राम वनगमन का मंचन किया गया। इस दौरान रामलीला का आनंद उठाने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। जय श्रीराम के जयकारे से पंडाल गुंजायमान होता रहा। अयोध्या के महाराज दशरथ चौथापन आने के बाद राज्य का कार्यभार किसे सौंपा जाए, इसके लिए मंत्री सुमंत के साथ गुरु वशिष्ठ के पास गए। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें राम को अयोध्या का राजा बनाने का सुझाव दिया। गुरु के आदेश पर महाराज दशरथ ने सुमंत तैयारियां पूरी करने का आदेश दिया। इधर यह खबर दासी मंथरा को पता चली तो उसने महारानी कैकई के पास पहुंचकर सारा राज खोल दिया। मंथरा ने महारानी कैकेई को महाराज दशरथ के प्रति उद्वेलित करने का प्रयास किया। मंथरा ने कहा कि भरत के होते राम कैसे युवराज बन सकता है।
महारानी कैकई तो पहले उसकी बातों में नहीं आईं लेकिन बाद में उनकी मति मारी गई और वह राम को बनवास और भरत की राजगद्दी के लिए तैयार हो गई। मंथरा ने कहा कि देवासुर संग्राम में जो आपने महाराज के वचन को थाती स्वरूप रखा है, अब वक्त है उसे मांग लीजिए। इधर जब यह मंगल सूचना लेकर महाराज दशरथ राजमहल पहुंचे तो वह कोपभवन में बैठी मिलीं। कैकई की बात जानकर महाराज दशरथ व्याकुल हो उठे। महारानी कैकई को महाराज ने समझाने का प्रयास किया लेकिन वह तैयार न हुईं। श्री राम वलकल धारण कर वनवास के लिए चल देते हैं। अयोध्या के वासी उन्हें बहुत मनाते हैं लेकिन वह नहीं मानते। उधर निषाद राज केवट उन्हें गंगा पार कराता है। महाराज श्रीराम, दशरथ, कैकई कैकई, मंथरा, उर्मिला, केवट संवाद दर्शकों का मन मोह लेता है।