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पीटीआई अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया

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नूंह। कई महीने पहले नौकरी से हटाए गए पीटीआई अध्यापकों ने सरकार के खिलाफ बृहस्पतिवार को जिला सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें हटाए गया था। इसके बाद से ही इनका जिले में धरना प्रदर्शन जारी है। प्रदेश में पीटीआई के 1983 अध्यापकों को पद मुक्त किया गया है। इनमें प्रदेश के साथ नूंह जिले में तैनात 29 पीटीआई अध्यापकों को भी रिलीव किया गया है।
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धरने पर बैठे जिला पीटीआई एसोसिएशन के जिला प्रधान ललित ने कहा कि इस भर्ती की प्रक्रिया में किसी भी अध्यापक की कोई गलती नहीं है। एचएसएससी द्वारा ही इस भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नई भर्ती प्रक्रिया के आदेश भी दिए। लॉकडाउन के दौरान किसी भी अध्यापक को नहीं हटाने के लिए भी कहा गया था। प्रदेश सरकार ने इस भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने से पूर्व ही उन्हें रिलीव कर दिया। इस मामले में प्रदेश सरकार ने उनकी सुप्रीम कोर्ट में वकालत नहीं की। वे लंबे समय से पीटीआई के पदों पर वह कार्य कर रहे हैं। ऐसे में कार्यमुक्त करने के आदेश को वापस लिया जाए।
सरकार द्वारा अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए 10 वर्षों से कार्यरत शारीरिक शिक्षकों की सेवा को बचाने का प्रयास करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि इस निर्णय को लॉकडाउन समाप्त होने के पश्चात पांच महीनों में लागू करें लेकिन प्रदेश सरकार ने लॉकडाउन भी समाप्त नहीं होने दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अध्यापकों की मेरिट प्रक्रिया पर कहीं सवाल नहीं उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला भर्ती प्रक्रिया को दोषपूर्ण करार दिया है। भर्ती प्रक्रिया बदलने वाले अधिकारियों व नेताओं पर कार्रवाई बनती थी। ऐसे में सरकार को फिर से उनके हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जाती तब तक उनका धरना जारी रहेगा। इस मौके पर तावडू खंड प्रधान अशोक, हसीन प्रधान नूंह, हसीन, इकबाल प्रधान नगीना, प्रेम कौर व सुरेंद्र सहित अन्य मौजूद रहे।
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