विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन मूल कड़ी है। चाहे वह घर हो या स्कूल, अनुशासन का होना बेहद जरूरी है। यही नहीं पुलिस से बातचीत करने में विद्यार्थियों को घबराना नहीं चाहिए।
छात्राएं जब चाहे अपनी परेशानियों से पुलिस को अवगत करा सकती हैं। यह बातें शुक्रवार को सेक्टर-12 के राजकीय इंटर कॉलेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित ‘पुलिस की पाठशाला’ में छात्र-छात्राओं को सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए सब इंस्पेक्टर केके यादव ने कहीं।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि समाज में सुरक्षा मुख्य मुद्दा है। इसका जिम्मा पुलिस का है। अंग्रेजों के समय में पुलिस दमनात्मक रवैया अपनाती थी। लेकिन आज के दौर की पुलिस समाज में मित्र के समान है।
पुलिस केवल दंड देने के लिए नहीं बनी है बल्कि समाज में सहयोग के लिए तैयार रहती है। यही नहीं किसी को भी जरूरत पड़ने पर पुलिस से संपर्क करना चाहिए। इसके लिए 100 नंबर पर फोन कर पुलिस की सहायता ली जा सकती है।
छात्राओं को समझाया कि घर से स्कूल या स्कूल से घर जाने के दौरान रास्ते में किसी तरह की परेशानी आती हो। कोई असामाजिक तत्व उन्हें परेशान करता हो तो उन्हें तुरंत पुलिस की मदद लेनी चाहिए। इसके लिए महिला हेल्पलाइन 1090 पर कॉल करनी चाहिए।
यही नहीं अगर छात्राएं घर पर अकेली हों और उन्हें पुलिस की सुरक्षा चाहिए तो उन्हें स्थानीय थाने का नंबर जरूर रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।
अमूमन लोग पुलिस से बात करने पर घबराते हैं। लेकिन छात्र-छात्राओं को एकदम घबराना नहीं चाहिए बल्कि अपनी समस्या पुलिस के सामने खुल कर रखनी चाहिए। पुलिस आपके साथ है।
इस मौके पर राजकीय इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल शेर सिंह वरुण ने कहा कि आज के दौर में छात्र-छात्राओं को स्कूल में अनुशासन में रहते हुए पढ़ाई करनी चाहिए।
अगर प्रतियोगिता के इस दौर में अनुशासन की कमी हुई तो वे आगे नहीं बढ़ पाएंगे। चाहे वह पढ़ाई हो, खेल हो या फिर घर में माता-पिता के साथ रहना हो। हर जगह अनुशासन बनाए रखना चाहिए। अनुशासन से स्कूल, शहर, देश और समाज में तरक्की होती है।
पाठशाला के बाद छात्रों ने अलग से की बात
पाठशाला खत्म होने के बाद कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने पुलिस से अपनी बातें शेयर की। उन्होंने रोजाना की जिंदगी में होने वाली मुश्किलें हल करने और पुलिस से दोस्ताना माहौल रखने के लिए जरूरी टिप्स लिए।
पुलिस से हाथ मिलाने को उत्सुक रहीं छात्राएं
यह पुलिस के साथ दोस्ताना माहौल की शुरूआत कही जा सकती है क्योंकि पुलिस को देखकर डरने वाली छात्राओं ने पाठशाला के बाद पुलिस अधिकारी से हाथ मिलाया। उन्हें पुलिस से सहयोग मिलने का दिलासा दिलाया गया।