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Noida News: यीडा में दौड़ेगी पॉड टैक्सी, बनेगा दुनिया का सबसे लंबा कॉरिडोर

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यीडा में दौड़ेगी पॉड टैक्सी, बनेगा दुनिया का सबसे लंबा कॉरिडोर
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- 2026 तक दौड़ाने की तैयारी, देश की पहली पॉड टैक्सी परियोजना, एक साथ 16 यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाएगी 112 पॉड



- नोएडा एयरपोर्ट से फिल्म सिटी समेत अन्य औद्योगिक सेक्टरों को जोड़ेगी, एक सप्ताह में जारी होंगे ग्लोबल टेंडर



नंबर



14.6 किमी लंबा होगा कॉरिडोर



12 स्टेशन बनेंगे



40 किमी प्रति घंटे होगी अधिकतम रफ्तार



631 करोड़ रुपये की आएगी लागत



10 रुपये प्रति किमी होगा किराया



माई सिटी रिपोर्टर



ग्रेटर नोएडा। नोएडा एयरपोर्ट से फिल्म सिटी और औद्योगिक सेक्टरों को जोड़ने के लिए बिना चालक वाली पॉड टैक्सी परियोजना को शासन ने मंजूरी दे दी है। शासन ने वर्ष 2026 तक परियोजना को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अगले सप्ताह परियोजना के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाएंगे। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर इसका निर्माण किया जाएगा। यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में दुनिया का सबसे लंबा पॉड टैक्सी कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसकी लंबाई 14.6 किमी होगी। फिलहाल सबसे लंबा कॉरिडोर अमेरिका में मॉगर्नटाउन शहर में है। जिसकी लंबाई 12.2 किमी है।

देश के पहले पॉड टैक्सी कॉरिडोर पर 12 स्टेशन बनाए जाएंगे। कॉरिडोर पर अधिकतम 40 किमी प्रति घंटे की स्पीड 112 पॉड टैक्सियां दौड़ेंगी। यीडा के 60, 75 और 100 मीटर रोड पर 631 करोड़ रुपये की लागत से ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। कॉरिडोर बन जाने के बाद नोएडा एयरपोर्ट से फिल्म सिटी तक का सफर 60 रुपये में पूरा किया जा सकेगा। वहीं पूरे कॉरिडोर का सफर करने के लिए करीब 160 रुपये देने होंगे।
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दरअसल, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, डाटा सेंटर समेत कई विदेशी टाउनशिप प्रस्तावित हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सितंबर-2024 में उड़ान भरने की तैयारी है। ऐसे में यीडा के इस क्षेत्र को वाहन फ्री और कार्बन फ्री रखने के लिए पॉड टैक्सी परियोजना पर विचार किया गया था। करीब एक साल से लगातार कई बैठकों में किसी न किसी कारण से इसके प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पा रही थी। बुधवार देर शाम को लखनऊ में शासन की बैठक में परियोजना पर मुहर लगा दी गई। पॉड टैक्सी के विकासकर्ता कंपनी से 35 वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। कंपनी का चयन करने के लिए आरएफपी निकालने पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा।


लंदन मॉडल के आधार पर होगा निर्माण


यीडा ने इंडियन पोर्ट रेल एंड रोपवे काॅरपोरेशन लिमिटेड से दूसरे देशों में चल रही पॉड टैक्सी का तुलनात्मक अध्ययन कराया था। यीडा में लंदन मॉडल के आधार पर पॉड टैक्सी का संचालन होगा। करीब 18 देशों में शुरू हुई पॉड टैक्सी परियोजना फिलहाल केवल 8 देशों में चल रही है। लंदन में पॉड टैक्सी लाभ में है। जबकि अबू धाबी में घाटे में है और कोरिया में नो प्रॉफिट नो लॉस पर इसका संचालन किया जा रहा है।



यह होंगे 12 स्टेशन



नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सेक्टर-35, सेक्टर-34, सेक्टर-33, सेक्टर-32, सेक्टर-29, सेक्टर-21 में तीन, सेक्टर-28 में दो स्टेशन और 100 मीटर रोड पर एक स्टेशन बनाए जाएंगे। पॉड टैक्सी यीडा के 60 मीटर, 75 मीटर और 100 मीटर रोड पर दौड़ेगी। इस रूट से एयरपोर्ट से फिल्म सिटी केवल छह किमी है। हालांकि पूरे कॉरिडोर की लंबाई 14 किमी से ज्यादा होगी। कॉरिडोर से हैंडिक्राफ्ट पार्क, एमएसएमई पार्क, अपैरल पार्क, टॉय पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क आदि समेत अन्य औद्योगिक परियोजनाओं से जोड़ा जा सकेगा।



पूरी तरह ऑटोमैटिक होगी, 10 रुपये प्रति किमी होगा किराया



पॉड टैक्सी इसका किराया 10 रुपये प्रति किमी होगा। पूरी तरह ऑटोमैटिक होने के कारण यात्रियों को सीट के पास लगे सिस्टम से अपने गंतव्य के लिए कमांड देना होगा। एक बार कमांड देने पर यह सीधे गंतव्य पर ही रुकेगी।



रोजाना सफर करेंगे आठ हजार लोग



डीपीआर के अनुसार पाॅड टैक्सी का संचालन शुरू होने पर रोजाना करीब आठ हजार यात्री सफर करेंगे। भविष्य में इसे डबल ट्रैक वाली पॉड टैक्सी के कॉरिडोर को बनाने का भी प्रस्ताव है। यदि यात्रियों की संख्या का लक्ष्य पूरा हुआ तो डबल ट्रैक वाला कॉरिडोर बनाया जाएगा।



छह यात्री बैठेंगे, 10 खड़े होकर करेंगे सफर



पाॅड टैक्सी में 6 यात्री बैठकर और 10 यात्री खड़े होकर सफर करेंगे। पहले चरण में 112 पॉड आएंगी। जबकि दूसरे चरण में 24 सीटर पॉड लाई जाएंगी। जिससे लगभग हर रोज 30 से 32 हजार यात्री हर रोज सफर कर सकेंगे। भविष्य में पॉड की संख्या 500 तक बढ़ाई जा सकती है।
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कोट



शासन ने लखनऊ में हुई बैठक में यीडा क्षेत्र में पॉड टैक्सी चलाने की मंजूरी दे दी है। अगले सप्ताह ग्लोबल टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। शासन की ओर से मार्च 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य दिया गया है। इससे शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।- डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यमुना प्राधिकरण।
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