ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बसंतपुर गांव (नया गांव) में शुक्रवार रात बारिश के बीच ग्रामीणों को शव का अंतिम संस्कार करने में मशक्कत करनी पड़ी। टीनशेड नहीं होने की वजह से ग्रामीणों ने तिरपाल लगाया, लेकिन बारिश के कारण मुखाग्नि पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में लकड़ी और उपलों पर डीजल डालकर अंतिम संस्कार किया गया। इस मामले के बाद ग्रामीणों में प्राधिकरण और प्रशासन के खिलाफ रोष है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हरवीर नागर छह माह से कैंसर से पीड़ित थे। वह कस्टम विभाग में तैनात थे। बृहस्पतिवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उनको आगरा स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां देर रात उनकी मौत हो गई। शुक्रवार दोपहर शव गांव लगाया गया। अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी, तभी बारिश शुरू हो गई। शाम तक बारिश बंद नहीं हुई।
करीब आठ घंटे इंतजार करने के बाद ग्रामीण और परिजन रात आठ बजे शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि वहां भी कुछ देर इंतजार किया। बारिश नहीं रुकने पर तिरपाल लगाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन बारिश और हवा के कारण मुखाग्नि बुझ गई। घी और अन्य सामग्री भी डाली गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस पर 10 लीटर डीजल मंगवाया गया और लकड़ी और उपलों पर डीजल डालकर मुखाग्नि दी गई।
मुख्यमंत्री से की शिकायत
ग्रामीण गौरव विकल ने बताया कि ग्रेनो के विकास के चर्चे विदेश तक हैं, लेकिन प्राधिकरण से आठ किमी दूर गांव में अंतिम संस्कार करने की भी व्यवस्था नहीं है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से ई-मेल और पोर्टल पर की है। साथ ही जिलाधिकारी और प्राधिकरण से शिकायत की है। श्मशान घाट को विकसित कराने की मांग की गई है।
पहले भी आ चुके हैं इस तरह के मामले
ग्रेनो में यह पहला मामला नहीं है कि जब लोगों को श्मशान घाट में समस्याओं का सामना करना पड़ा हो। पिछले वर्ष ग्रेनो वेस्ट के रोजा जलालपुर गांव में ग्रामीणों को गंदे पानी से होकर श्मशान घाट के लिए जाना पड़ा था। एक शव यात्रा का वीडियो भी वायरल हुआ था, तब प्राधिकरण ने कार्रवाई की थी।