औद्योगिक क्षेत्रों में शिफ्ट बदलते ही हजारों कर्मचारी एक साथ सड़क पार करते हैं, 22 स्थानों पर रोजाना थमती है यातायात की रफ्तार
काव्यांश मिश्रा
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर देश के सबसे बड़े औद्योगिक जिलों में शुमार है, लेकिन अब यहां ट्रैफिक जाम की वजह सिर्फ वाहनों की बढ़ती संख्या नहीं रह गई है। औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों का एक साथ सड़क पार करना भी जाम की बड़ी वजह बन गया है। सुबह फैक्ट्रियों की शिफ्ट शुरू होने और शाम को छुट्टी के समय हजारों कर्मचारी मुख्य सड़कों पर उतरते हैं। अधिकांश स्थानों पर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) नहीं होने से लोगों को वाहनों के बीच से सड़क पार करनी पड़ती है। नतीजतन कुछ ही मिनटों में ट्रैफिक की रफ्तार थम जाती है और लंबा जाम लग जाता है।
करीब 1,282 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले जिले में बीते पांच वर्षों के दौरान 1,40,225 औद्योगिक इकाइयां पंजीकृत हुई हैं। इनमें लगभग 6.36 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। अधिकांश फैक्ट्रियों में दो प्रमुख शिफ्टों में काम होता है। सुबह कर्मचारी एक साथ फैक्ट्रियों की ओर जाते हैं और शाम को एक साथ बाहर निकलते हैं। इसी दौरान सेक्टर-63, फेज-2, सूरजपुर, ईकोटेक, कासना, छिजारसी, सेक्टर-18 सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों की मुख्य सड़कें पैदल आवाजाही से भर जाती हैं।
स्थिति यह है कि कई स्थानों पर एक किलोमीटर का सफर तय करने में 20 मिनट तक लग जाते हैं, जबकि सामान्य दिनों में 20 मिनट का रास्ता शिफ्ट बदलने के समय डेढ़ घंटे तक में पूरा हो पाता है। कर्मचारी सड़क पार करने के लिए जैसे ही वाहनों के बीच उतरते हैं, ट्रैफिक सिग्नल और पुलिस की व्यवस्थाएं भी बेअसर नजर आने लगती हैं। लगातार रुकते वाहनों के कारण पीछे लंबी कतारें लग जाती हैं और पूरा कॉरिडोर जाम की चपेट में आ जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिले की तेजी से बढ़ती आबादी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। केवल नोएडा की आबादी ही आठ लाख से अधिक है, जबकि ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में भी तेजी से आवासीय विस्तार हो रहा है। अधिकांश आवासीय सोसायटियों में चार या उससे अधिक सदस्य रहते हैं, जबकि किराये पर रहने वाले लोगों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक मानी जाती है। दूसरी ओर, परिवहन विभाग के अनुसार जिले में 12 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों को जोड़ दें तो सड़कों पर दबाव और बढ़ जाता है।
ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों के आसपास पर्याप्त संख्या में फुट ओवर ब्रिज, स्काईवॉक और सुरक्षित पैदल क्रॉसिंग विकसित की जाएं तो जाम की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। इससे न केवल यातायात सुचारु रहेगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी घटेगा।
22 जगहें जहां शिफ्ट बदलते ही लगता है जाम
ट्रैफिक पुलिस ने जिले में 22 ऐसे हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं, जहां सुबह और शाम सबसे अधिक जाम लगता है। इनमें सेक्टर-52, छिजारसी, एनएसईजेड, सेक्टर-18, सेक्टर-12/22, सेक्टर-15 चौराहा, कुलेसरा, मॉडल टाउन गोलचक्कर, बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन, सूरजपुर और परी चौक प्रमुख हैं। अधिकांश स्थानों पर सुरक्षित पैदल पारपथ या एफओबी की कमी है। मॉडल टाउन में स्काईवॉक का निर्माण जारी है, जबकि अन्य स्थानों पर भी एफओबी निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है।
बढ़ती आबादी और वाहनों का दोहरा दबाव
नोएडा की आबादी 8 लाख से अधिक।
ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में भी तेजी से बढ़ रही है आबादी।
जिले में 12 लाख से ज्यादा पंजीकृत वाहन।
बाहरी जिलों से आने वाले हजारों वाहन भी रोज सड़कों पर उतरते हैं।
औद्योगिक और आवासीय विस्तार के कारण पैदल यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
एक नजर में जिले की तस्वीर
क्षेत्रफल: 1,282 वर्ग किमी
पंजीकृत औद्योगिक इकाइयां: 1,40,225
कार्यरत कर्मचारी: 6,36,400
प्रमुख शिफ्ट: 2
ट्रैफिक हॉटस्पॉट: 22
मुख्य चुनौती: एक साथ सड़क पार करते हजारों पैदल यात्री
स्थायी समाधान: एफओबी, स्काईवॉक और ट्रैफिक इंजीनियरिंग में सुधार
ऐसे बनता है जाम का चक्र
शिफ्ट बदलते ही हजारों कर्मचारी एक साथ फैक्टरियों से निकलते हैं।
बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन और पार्किंग तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क पार करते हैं।
वाहनों को बार-बार रुकना पड़ता है।
कुछ ही मिनटों में पीछे लंबी कतारें लग जाती हैं।
डिवाइडर फांदने और बीच सड़क से गुजरने के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है।