नोएडा। बदलती जीवनशैली का बुरा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है। इससे न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक हानि भी हो रही है। व्यक्ति समय से पहले बूढ़ा होने लगता है। साथ ही उम्र भी घटती जा रही है। इस विषय पर समय से सोचना होगा। रविवार को सेक्टर-18 स्थित होटल रेडिसन में वर्ल्ड कांग्रेस ऑन क्रोनोमेडिसिन 2021 के समापन अवसर पर देश-विदेश के विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली से बिगड़ती सेहत के प्रति चेताते हुए यह जानकारी दी। मेट्रो अस्पताल के चेयरमैन डॉ. पुरुषोत्तम लाल ने कहा कि दो दशक में हार्टअटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। रात्रि में काम करने के चलन से लोगों को बीमारियां हो रही हैं। जीवनशैली में सुधार जरूरी है।
एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव डॉ. एस चक्रवर्ती ने कहा कि रात में काम करने वाले लोगों में मोटापा, हृदय, मधुमेह, हाइपरटेंशन सहित अन्य बीमारियां ज्यादा होती है। जरूरी है कि ऐसे लोगों को दवाओं की सही डोज दी जाए। डॉक्टरों को पर्चे पर दवा खाने का समय भी अंकित करना चाहिए। कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ फीजीशियन डॉ. एके शुक्ला ने कहा कि रात्रि में ड्यूटी करने वालों को हो रही बीमारियों को आधार बनाकर कर्मचारियों को अधिक मानदेय दिलाने का प्रस्ताव एपीआई के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही, मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करने वाले लोगों और प्रबंधकों को बढ़ रहे इस खतरे से आगाह किया जाएगा। अंतिम दिन डॉ. किरण सेठ, डॉ. अमितेश अग्रवाल ने क्रोनोलॉजी इन न्यूरोलॉजी और गैर संचारी रोग पर व्याख्यान दिया।
सुबह 6 से 10 बजे के बीच हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि सुबह और रात को शरीर में बदलाव आते हैं। जब व्यक्ति सुबह सो कर उठता है तो रक्तचाप बढ़ा होता है। जबकि, रात में कम होता है। सुबह दिल के दौरे ज्यादा पड़ते हैं। अस्पतालों की इमरजेंसी में हार्ट अटैक के 30 फीसदी मरीज सुबह 6 से 10 बजे के बीच पहुंचते हैं। लिहाजा, बीमारी के अनुसार दवाओं का सही समय पर सेवन करना अहम है। बीमारियों से बचाव के लिए भारत की पुरातन जीवनशैली का पालन करने पर विशेषज्ञों ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि सूर्योदय से पहले उठना और रात में आठ से 10 बजे के बीच सो जाना चाहिए। नींद के दौरान नेगेटिव हार्मोन का दुष्प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता है।