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Noida News: प्राण वायु देवताओंं को पेंशन की संजीवनी

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75 साल से बुजुर्ग पेड़ों की रखवाली के लिए आगे आ रहे लोग, मिल रहे प्रतिवर्ष 3000 रुपये
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नए सर्वे में 1451 नए पेड़ों की हुई पहचान, नूंह में 262, कैथल में 177 और फतेहाबाद में 248 नए हैं पेड़



आशीष वर्मा

चंडीगढ़। हरियाणा में पेड़ों को भी पेंशन मिलती है। जी हां, 75 साल से उम्र से ज्यादा बुजुर्ग पेड़ों को हर साल 3200 रुपये दिए जाते हैं। पेड़ों को पेंशन की संजीवनी की आस में लोग ऐसे पेड़ों की रखवाली के लिए सामने आने लगे हैं। पेंशन लेने वाले पेड़ों का कुनबा बड़ा हो गया है। राज्य में ऐसे 5344 पेड़ों की पहचान की गई है। इन पेड़ों को प्राण वायु देवता का नाम दिया गया है। इनमें 1451 पेड़ों को हाल ही में शामिल किया गया है।

वर्ष 2023 में प्राण वायु देवता पेंशन योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 75 साल या उससे ज्यादा उम्र के स्वस्थ और वन भूमि से बाहर के पेड़ों की देखभाल करने वाले लोगों को सालाना अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान इन पेड़ों पर ही खर्च किया जाना होता है। 40 देशी प्रजातियों के पेड़ों के लिए यह अनुदान दिया जाता है। इनमें आम, नीम, पीपल, बरगद, पिलखन और कैम्ब भी शामिल हैं। गिरे हुए, खोखले और बीमार पेड़ों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है।
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पहले चरण में ऐसे 3842 बुजुर्ग पेड़ों की पहचान की गई थी। जब योजना के बारे में लोगों के पता चला तो और दावे आने लगे। सरकार ने बजट में प्रावधान किया कि लोग ऐसे पेड़ों को पेंशन लगाने के लिए फिर से आवेदन कर सकते हैं। दूसरे चरण में आए आवेदनों के आधार पर वन विभाग ने सभी जिलों में सर्वे कर 1541 नए पेड़ों की पहचान की। वन विभाग की टीम यह मानिटरिंग करती है कि जिन पेड़ों के लिए पेंशन दी जा रही है, उनकी रखवाली ठीक से हो रही है या नहीं। इन दो वर्षों में 18 पेड़ इस योजना से बाहर कर दिए गए, उन्हें दी जा रही पेंशन बंद कर दी गई।

बुढ़ापा पेंशन के साथ-साथ बढ़ेगी पेड़ों की पेंशन भी

योजना की खास बात यह है कि हरियाणा सरकार ने इस योजना को बुढ़ापा पेंशन से जोड़ दिया है। यानी जब-जब बुढ़ापा पेंशन बढ़ेगी तो पेड़ों की पेंशन राशि में भी इजाफा होगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) विनीत गर्ग के मुताबिक सरकार ने बजट में एलान किया था कि जो पेड़ बच गए हैं उनका फिर सर्वे किया जाएगा।

ऐसे की जाती है पेड़ों की पहचान

लोगों के दावे के बाद वन विभाग की ओर से उन्हें एक फार्म दिया जाता है जिसमें 21 कॉलम भरने होते हैं। इनमें पेड़ का मालिक, जगह, प्रजाति, ऊंचाई, शाखाओं की चौड़ाई, सेहत, उम्र लिखने के साथ यह भी बताना होता है कि यह पेड़ आर्थिक और औषधीय रूप से कितने काम का है। आवेदन भरने के बाद एक जिला समिति इसकी जांच करती है जिसमें उपायुक्त, वन अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, राज्य जैव विविधता बोर्ड के और रेंज अधिकारी होते हैं। चयन के बाद पेड़ को प्रस्तावित करने वाले व्यक्ति के खाते में सरकार की ओर से हर साल 3000 रुपये राशि दी जाती है। पेड़ पर एक हरी पट्टी लगाई जाती है, जिसमें उनकी प्रजाति, उम्र, गांव और योजना में शामिल होने का साल लिखा जाता है। अधिकांश पेंशन वाले पेड़ पंचायत की जमीन पर लगे हैं। उसके बाद निजी, सरकारी, संस्थागत व धार्मिक भूमि पर। हरियाणा इस तरह की योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
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किस डिविजन में कितने पेड़



डिविजन नए कुल

झज्जर 28 121

करनाल 58 164

पानीपत 15 100

रोहतक 14 111

सोनीपत 99 234

अंबाला 37 91

कैथल 177 362

कुरुक्षेत्र 14 82

मोरनी-पिंजौर 00 201

यमुनानगर 45 550

फरीदाबाद 00 52

गुरुग्राम 45 112

महेंद्रगढ़ 10 59

नूंह 262 944

पलवल 37 167

रेवाड़ी 5 76

भिवानी 78 200

दादरी 55 75

फतेहाबाद 248 579

हिसार 28 271

जींद 114 267

सिरसा 172 458

कोट

यह सरकार की बहुत अच्छी पहल है। इससे पुराने पेड़ों को बचाने के लिए लोगों में भावनाएं जागृत हुई हैं। इसके रख रखाव के लिए जो भी पैसे आते हैं, उसका इस्तेमाल पेड़ की देखभाल में खर्च करते हैं।

नरेश कुमार, सरपंच पुंडरक गांव
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