ब्लॉक या जिला पंचायत के बकायेदार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएगा। प्रत्याशी को नामांकन के साथ नोड्यूज प्रमाण-पत्र देना होगा। वहीं, जो प्रमाण पत्र नहीं देगा, उसका नामांकन निरस्त कर दिया जाएगा। नामांकन के दौरान रिटर्निंग अधिकारी के पास बकायेदारों के नाम मौजूद होंगे। नामांकन पत्रों की गहनता से जांच की जाएगा।
जिले में दूसरे चरण के तहत 19 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 7 अप्रैल से ब्लॉक और जिला मुख्यालय पर नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे। नामांकन पत्र दाखिल करने वाले प्रत्याशी ब्लॉक और जिला पंचायत के किसी भी तरह के कर, शुल्क या जुर्माना के रूप में बकायेदार नहीं होना चाहिए। राज्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला पंचायत राज अधिकारी और अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को ऐसे लोगों की सूची रिटर्निंग अधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
जिससे नामांकन के दौरान सूची में बकायेदारों के नाम की पहचान हो सके। जिला पंचायत राज अधिकारी कुंवर सिंह यादव ने सभी खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी को अपने क्षेत्र के बकायेदारों की सूची बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं, जिला पंचायत के भी अधिकारी अपने बकायेदारों की सूची तैयार कर रहे हैं।
बिना अनुमति के दीवारों पर कर दी पेंटिंग
पंचायत चुनाव से करीब दो माह पहले से ही प्रत्याशियों ने अपने-अपने क्षेत्र में दीवारों पर पेंटिंग कर दी। इसमें प्रत्याशियों ने वोट देने की अपील की है। इसके लिए मकान मालिकों से भी अनुमति नहीं ली गई है। वहीं, आचार संहिता लागू होने के बाद भी उनको नहीं हटाया गया है।
सरकारी संपत्ति का नहीं कर सकेंगे प्रयोग
सत्ताधारी दल, उम्मीदवार, निर्वाचन एजेंट चुनाव के दौरान किसी भी सरकारी संस्था, सरकारी या अर्द्ध सरकारी विभाग के निरीक्षण गृह, डाक बंगला या किसी भी विश्राम गृह का प्रयोग चुनाव प्रचार या कार्यालय के लिए नहीं कर सकेंगे। सत्ताधारी दल के मंत्री सरकारी दौरे को चुनाव प्रचार में नहीं जोडे़ंगे। सरकारी कर्मचारी का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
पंचायत विभाग की निधि से किसी भी तरह का प्रचार नहीं किया जाएगा। किसी भी पंचायत विभाग से संबंधी संस्था से नई योजना की घोषणा या शुरू नहीं की जाएगी। अगर विकास कार्य की धनराशि पहले से जारी की जा चुकी है तो कार्य पहले की तरह जारी रहेगा। भारत सरकार या राज्य सरकार के मंत्री किसी मतदान केंद्र पर प्रवेश नहीं करेंगे।