-किसानों का आरोप-14 लाख एकड़ में खराब हुआ धान, फिर सरकारी रिकॉर्ड में बढ़ गया उत्पादन
-हल्दी रोग और बरसात से धान के दाने काले पड़ने की रिपोर्ट छिपा रही राज्य सरकार : किसान सभा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में धान खरीद का सीजन खत्म होने को है लेकिन आंकड़ों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने इस बार 54 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा था जबकि अब तक 59 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा जा चुका है। यानी लक्ष्य से करीब 5.14 लाख मीट्रिक टन ज्यादा। किसान संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि जब 14 लाख एकड़ में फसलें खराब हुईं तो सरकारी खरीद में बढ़ोतरी कैसे हो गई? कृषि एवं कल्याण विभाग ने बरसात के बाद तैयार रिपोर्ट में बताया था कि 14.74 लाख एकड़ धान किसी न किसी स्तर पर प्रभावित हुआ।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से राइस मिलरों और आढ़तियों ने फर्जी पंजीकरण कराए। बाहरी राज्यों से सस्ता धान मंगाकर सरकारी खरीद में शामिल किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरदावरी का काम जानबूझकर अधूरा छोड़ा गया ताकि फसलों के नुकसान का ब्योरा सामने न आ सके। अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य प्रधान मास्टर बलबीर सिंह और उपाध्यक्ष प्रीत सिंह का कहना है कि राज्य सरकार हल्दी रोग और बरसात से धान के दाने काले पड़ने की रिपोर्ट छिपा रही है। खरीद पोर्टल पर गड़बड़ी और देरी ने किसानों को नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद उत्पादन का आंकड़ा लक्ष्य से ज्यादा कैसे पहुंच गया, यह सवाल किसानों को बेचैन कर रहा है। कुरुक्षेत्र के किसान सतेंद्र पाल बताते हैं कि जहां पिछले साल 25-26 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ था, इस बार मुश्किल से 16-17 क्विंटल निकला। नुकसान साफ दिख रहा है पर आंकड़ों में नहीं।
कृषि विभाग के अनुमान और जमीन की हकीकत में फर्क
25% तक नुकसान : 11,46,343 एकड़
50% तक नुकसान : 2,02,690 एकड़
75% तक नुकसान : 62,339 एकड़
100% तक नुकसान : 63,421 एकड़
धान की स्थिति और कटाई का हाल
बासमती क्षेत्रफल : 22.64 लाख एकड़
गैर-बासमती क्षेत्रफल : 20.81 लाख एकड़
उपज अनुमान : 4031 किग्रा प्रति हेक्टेयर
नॉन-बासमती कटाई पूरी : 96.16%
बासमती कटाई पूरी : 74.27%
वर्षवार धान खरीद (लाख मीट्रिक टन में)
वर्ष धान खरीद
2021 59
2022 59
2024 54 (लक्ष्य)
स्रोत: खाद्य एवं आपूर्ति विभाग मुख्यालय
वर्जन
बाहरी राज्यों से धान नहीं खरीदा गया। जिन इलाकों में बारिश या रोग का असर नहीं पड़ा, वहां अधिक उत्पादन से बाकी की कमी पूरी हो गई। कृषि विभाग को हल्दी रोग और बरसात से प्रभावित फसलों की रिपोर्ट जल्द देने के लिए कहा गया है। - राजेश नागर, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हरियाणा
प्रदेश में इस बार हल्दी रोग के अलावा बरसात के कारण धान के दाने का रंग काला पड़ने का खाद्य आपूर्ति विभाग ने हमारी शिकायत पर ब्योरा मांगा था मगर 14 अक्तूबर से धान की गुणवत्ता पर पड़ने वाले असर का ब्योरा कृषि एवं कल्याण विभाग ने नहीं दिया। -हर्ष गिरधर, संयोजक, हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन