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Noida News: जिले में बिक रहा बिहार और उत्तर प्रदेश का धान

Fri, 24 Oct 2025 12:25 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
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दूसरे राज्य से लाए गए धान की बोरियों को ट्रॉली में लादते मजदूर। भाकियू
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिले की कई राइस मिलों में धान के नाम पर बड़ा खेल हो हो रहा है। कई राइस मिलर उत्तर प्रदेश व बिहार के व्यापारियों से कम दाम पर धान खरीद रहे हैं। फिर इसी धान को जिला की मंडियों में चहेते किसानों के माध्यम से बेच कर मोटी कमाई की जा रही है। इसका खुलासा उत्तर प्रदेश व बिहार के आ रहे धान से लदे वाहन पकड़े जाने पर हुआ।
भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी के नेताओं ने हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर 19 अक्तूबर को कई ऐसे ट्रकों को पकड़ा जिनमें यूपी व बिहार का धान था। इन ट्रकों में लोड धान के जब बिल जांचे गए तो इन पर जिले की कई राइस मिलों का पता लिखा हुआ था। जिससे साफ है कि दूसरे राज्यों से आया धान सीधे जिले की राइस मिलों में उतर रहा है।
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दरअसल यूपी व बिहार में धान का दाम हरियाणा से काफी कम है। बिहार से आए ट्रकों से जो बिल हाथ लगे हैं उनमें धान का रेट 2075 रुपये और उत्तर प्रदेश से लाए गए बिलों पर धान का रेट 2040 रुपये प्रति क्विंटल लिखा हुआ है। वहीं हरियाणा में ग्रेड-ए धान की कीमत 2389 रुपये व कॉमन धान का निर्धारित रेट 2369 रुपये है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के एक बिल के अनुसार ट्रक में कुल 304 क्विंटल धान था। 2040 रुपये के हिसाब से इसकी कीमत 6,20,160 रुपये बनती है। इसी धान को 2,389 रुपये की दर से जिले की अनाज मंडियों में 7,26,256 रुपये का बेच कर एकमुश्त 1,06,096 रुपये का मुनाफा है।
जिन राइस मिलों में दूसरे राज्यों का धान मंगवाया जा रहा है उनमें से ज्यादातर प्रतापनगर व छछरौली क्षेत्र में स्थित हैं। कई ट्रक ऐसे थे जिनके पास बिल भी नहीं थे और उनमें धान भरा था। साथ ही दर्जनों ट्रक चावल के भी पकड़े गए हैं। कई राइस मिलर ऐसे हैं, जिन्होंने आढ़ती का भी लाइसेंस लिया है।
राइस मिलर दूसरे राज्यों से सस्ता धान मंगवा और इसे जिले की मंडियों में महंगे रेट पर बेच कर ही मुनाफा नहीं कमा रहे, बल्कि मंडी में बिकने के बाद यही धान सीएमआर स्कीम के तहत फिर से राइस मिल में पहुंच जाता है। यही राइस मिलर सरकार से धान कुटाई का एग्रीमेंट कर लेते हैं। ऐसा करने पर राइस मिलर को सरकार से लिए गए एक क्विंटल धान में से केवल 67 किलोग्राम चावल ही वापस करना होता है। चावल के टूकड़े, भूसी व अन्य सामान को बेच कर राइस मिलर कमाई करते हैं।
कम पैदावार फिर कैसे पूरा हुआ लक्ष्य

एक तरफ कृषि विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि इस बार तेज व ज्यादा बारिश होने से धान की पैदावार पर असर पड़ा है। प्रति एकड़ धान की पैदावार 20 प्रतिशत तक कम हुई है। यदि पैदावार कम हुई तो एजेंसियों ने अपना छह लाख मीट्रिक टन का खरीद लक्ष्य कैसे पूरा कर लिया। इतना ही नहीं पिछले साल से कहीं ज्यादा धान इस बार मंडियों में पहुंच चुका है। छछरौली अनाज मंडी में अभी तक 47,106 मीट्रिक टन और प्रतापनगर में 1,10,473 एमटी धान खरीदा जा चुका है।
मंडियों में आढ़ती का काम करने वाले लोग अब राइस मिलर बन गए हैं। उन्हें पता है कि मंडियों में बाहर से धान मंगवा कर कैसे बेचना हैं। एक तरफ सरकार दूसरे राज्यों का धान मंडियों में न आने का दावा करती है तो दूसरी तरफ सरेआम धान जिला की मंडियों पहुंच रहा है। हमने जो ट्रक पकड़े थे उनका धान राइस मिलों में ही जाना था। - मंदीप सिंह रोडछप्पर, निदेशक, भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी।
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राइस मिलरों के पास ट्रेडिंग का लाइसेंस भी है। जो राइस मिलर आढ़ती हैं, वह धान को मंडियों में बेच देते होंगे। यदि कोई बिना बिल के धान मंगवा कर मंडियों में बेच रहे हैं तो वह गलत कर रहा है।

- मनीष बंसल, जिलाध्यक्ष, जिला राइस मिलर्स एंड डीलर एसोसिएशन।

दूसरे राज्य से लाए गए धान की बोरियों को ट्रॉली में लादते मजदूर। भाकियू

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