प्रोमोटर के लिए परियोजना भूमि पर स्वामित्व जरूरी
- यूपीरेरा ने जारी किए आदेश, स्वामित्व के बगैर नहीं होगा पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा/लखनऊ। बिल्डर या प्रोमोटर जिस भूमि पर परियोजना का विकास प्रस्तावित कर रहे हैं उस पर उनका कानूनी स्वामित्व होना आवश्यक है। परियोजना की भूमि पर किसी अन्य के मालिकाना हक होने पर प्रोजेक्ट का पंजीकरण नहीं होगा। किसी और की जमीन होने पर प्रोमोटर की ओर से परियोजना के विकास के लिए भू-स्वामी की लिखित सहमति जरूरी हेागी। भू-स्वामी के साथ पंजीकृत ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (जेडीए) जरूरी होगा।
उत्तर प्रदेश रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने बताया की प्रोमोटर की ओर से परियोजना की सीसी या ओसी प्राप्त करने के बाद आवंटी के नाम पंजीकृत बैनामा किया जाएगा। इकाई का कब्जा हस्तगत किया जाएगा। रेरा ने आवंटियों के हितों की सुरक्षा करने और पंजीकृत बैनामे के साथ स्वामित्व हस्तानान्तरण सुनिश्चित करने के लिए यह आदेश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रोमोटरों को रेरा में यह शपथ-पत्र दिया जाएगा कि परियोजना की भूमि भार मुक्त है।
यदि उस पर कोई भार या देनदारी है तो प्रोमोटर द्वारा शपथ-पत्र के माध्यम से उसकी स्पष्ट घोषणा की जाएगी। उत्तर प्रदेश रेरा ने परियोजना की भूमि पर प्रोमोटर के स्वत्व तथा भार के संबंध में नियमानुसार समाधान करने के पश्चात परियोजना का पंजीकरण किया जाएगा। परियोजना की भूमि पर प्रोमोटर का स्वामित्व न होने पर या भूमि-स्वामी की सहमति तथा संयुक्त विकास अनुबंध न होने की स्थिति में परियोजनाओं के पंजीकरण आवेदन के निस्तारण में भी समस्याएं आती हैं। आवेदन पत्रों पर निर्णय में अनावश्यक विलंब होता है। रेरा द्वारा यह बातें प्रोमोटर्स को लगातार बताई जाती रही हैं और अब उन्हें बहुत स्पष्ट रूप से यह जानकारी दे दी गई है।