केंद्र सरकार के अध्यादेश का प्रदेश भाजपा के नेताओं ने स्वागत किया
सचदेवा ने कहा- केजरीवाल दिल्ली की भलाई के लिए नहीं, कमियां छिपाने के लिए कर रहे मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली की प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए लाए गए अध्यादेश का स्वागत किया है। नेताओं का कहना है कि दिल्ली की गरिमा और जनता के हितों के लिए इसका आना जरूरी था। अध्यादेश का पैरा 95 बिल्कुल स्पष्ट कहता है कि जिस राज्य की सूची में किसी भी कानून का अभाव हो और उस कानून की स्पष्टता को बाधित करता हो, ऐसे केस में केंद्र सरकार को राज्य सरकार की सूची में जाकर कानून बनाने का अधिकार है। वहीं, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने मुख्यमंत्री को सरकार में एक विभाग संभालने की सलाह दी है, ताकि संविधान के आर्टिकल्स की जानकारी उन्हें हो सके। उन्होंने कहा कि केजरीवाल अभी उस रास्ते पर चल रहे हैं कि जहां वे पाप करें और उनके मंत्री जेल जाएं।
मीडिया से बातचीत में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने 11 मई से 19 मई तक के घटना को सिलसिलेवार ढंग से रखा और केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 11 मई को सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से निर्णय दिया गया जिसके बाद मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल ने बैठक की। इसके बावजूद उनकी जल्दबाजी का नतीजा है कि 12 मई को ही दिल्ली सरकार सर्वोच्च न्यायालय चली गई और साथ ही सेवा सचिव आशीष मोरे को हटाने की सिफारिश करदी । 13 मई को मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सतर्कता सचिव राजशेखर को हटाने का आदेश जारी कर दिया। 15 मई की बैठक में सभी अधिकारियों से घोटालों की फाइलें छीनना शुरू किया गया। 16 मई की रात अधिकारियों के कार्यालय के ताले तोड़कर कागजों की फोटोस्टेट की गई। 17 मई को आशीष मोरे की जगह एके सिंह को नियुक्त करने की फाइल उपराज्यपाल के पास आई और उसी दिन स्वीकृति मिली, लेकिन 18 मई को बिना उपराज्यपाल से बात किए मुख्य सचिव को बदलने का ऐलान कर दिया गया जो उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है। एक योजनाबद्ध साजिश की गई। 19 मई को सौरभ भारद्वाज ने ऐलान किया कि सेवा सचिव अभी तक नहीं बदले गए और फिर पांच मंत्री धरने पर बैठे व केजरीवाल की सौदेबाजी करने उपराज्यपाल से मिलने चले गए। वे दिल्ली की भलाई के लिए नहीं, बल्कि अपनी कमियों को छिपाने के लिए मनमानी कर रहे हैं। वहीं, नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों की कार्यप्रणाली को समझते तो शायद उनका केंद्र सरकार, उपराज्यपाल व विपक्ष से टकराव नहीं होता।