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Noida News: अब डीयू के बीटेक प्रोग्राम में हिंदी और संस्कृत भी पढ़ेंगे छात्र

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-एबिलिटी एन्हेंसमेंट कंपल्सरी कोर्स के तहत किया गया शामिल
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-अकादमिक काउंसिल की बैठक में ये पाठ्यक्रम किया गया पास

-डिग्री में सुधार करने को शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव वापस हुआ

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। अब दिल्ली विश्वविद्यालय के बीटेक प्रोग्राम में छात्र हिंदी और संस्कृत की पढ़ाई भी करेंगे। डीयू ने एबिलिटी एन्हेंसमेंट कंपल्सरी कोर्स(एईसीसी) के तहत इसे शामिल किया है। शुक्रवार को हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में इसके लिए पाठ्यक्रम को पास कर इसे मंजूरी दे दी गई है। इस तरह से बीटेक में छात्रों के पास हिंदी या संस्कृत पढ़ने का विकल्प होगा। बैठक में भूगोल, आईटेप(चार वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) आधुनिक भारतीय भाषाओं, व बीए वोकेशनल साइंस के पांचवें व छठे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम को भी मंजूरी मिल गई है।

डीयू की शुक्रवार को रात समाप्त हुई अकादमिक काउंसिल की बैठक में डिग्री में सुधार के लिए शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी वापस हो गया है। डिग्री में सुधार के लिए आए प्रस्ताव का अकादमिक काउंसिल के सदस्यों ने विरोध किया। इसके बाद डीयू को यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। अकादमिक काउंसिल सदस्य डॉ. आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि तीन बीटेक प्रोग्राम (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग) में अब छात्रों को संस्कृत या हिंदी पढ़ने का अवसर भी मिलेगा।
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अकादमिक परिषद की बैठक में इसके लिए पाठ्यक्रम को पास कर दिया गया है। इसे छात्र एईसीसी के रूप में या तो हिंदी या संस्कृत को पढ़ेंगे। इसका चयन छात्रों को करना होगा। मालूम हो कि डीयू में वर्ष 2023 से तीन नए बीटेक प्रोग्राम की पढ़ाई शुरु की गई है। डॉ पांडेय ने बताया कि डिग्री में सुधार के लिए शुल्क बढ़ोतरी का प्रस्ताव लाया गया था। जिसके तहत छ: साल पुरानी डिग्री के लिए शुल्क को 1000 रुपये और उससे पुरानी डिग्री के लिए शुल्क को 2000 रुपये का प्रस्ताव था। लेकिन सदस्यों ने इसको लेकर काफी विरोध जताया जिसके बाद डीयू ने इस प्रस्ताव को वापस ले लिया।
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6 साल पुरानी डिग्री को 500 रुपये और उससे पुरानी के लिए एक हजार लगेगा शुल्क
इस तरह से छात्रों को छ: साल की डिग्री में सुधार के लिए 500 रुपये व उससे पुरानी डिग्री में सुधार के लिए 1000 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। उन्होंने बताया कि देशभर में एक जुलाई से लागू हुए तीन नए कानूनों को लॉ पाठ्यक्रम में शामिल करने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने के लिए बनाई कमेटी में अकादमिक परिषद के सदस्यों को शामिल करने को भी मंजूरी दी गई है। डीयू ने इस कमेटी में डॉ. आलोक रंजन पांडेय, डॉ. हितेंद्र तिवारी व डॉ. माया जॉन को शामिल किया है।
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12 वित्त पोषित कॉलेजों में जल्द होंगी स्थाई प्रिंसिपल की नियुक्तियां

सदस्यों ने कॉलेजों में प्रिंसिपल की स्थायी नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाया। जिस पर उन्हें बताया गया कि स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति यथाशीघ्र की जाएगी। मालूम हो कि कई कॉलेजों में 11-11 साल से एक ही प्रिंसिपल है। दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों में स्थायी नियुक्ति को लेकर भी डीयू प्रशासन ने परिषद सदस्यों को आश्वासन दिया है।
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