तेजी से बढ़ रही दवा जनित लिवर इंजरी
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. अपूर्व पांडे ने बताया फैटी लिवर उन लोगों में भी सामान्य रूप से मिल रहा है, जिनका शराब सेवन का इतिहास नहीं है। शारीरिक रूप से भी स्वस्थ नजर आते हैं। खाद्य पूरक, डॉक्टर की सलाह के बिना ली जाने वाली दवाइयां लिवर को नुकसान पहुंचाने का प्रमुख कारण हैं। पिछले कुछ सालों में दवा जनित लिवर इंजरी के मामले बढ़े हैं।
इस वजह से बढ़ रहे मामले
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. अभिनव कुमार ने बताया कि पिछले कुछ सालों में लीवर की समस्यां तेजी से बढ़ी हैं। वयस्कों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर की बीमारी का प्रचलन 38.9 और उच्च जोखिम वाले उपसमूहों में इसका प्रचलन लगभग 52.8 प्रतिशत है। हालांकि हेपेटाइटिस ए, बी, सी वायरल लीवर रोगों में कमी आई है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर वृद्धि का कारण एक गतिहीन जीवन शैली, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, स्वस्थ फलों और सब्जियों की कमी और मोटापा है।
शराब की वजह से भी बढ़ रही दिक्कत
डॉक्टरों का कहना है कि वयस्कों में लीवर सिरोसिस के अधिकांश मामलों का मुख्य कारण शराब का सेवन है। अध्ययन से पता चलता है कि लगभग 30 प्रतिशत लीवर से संबंधित मौतें शराब के सेवन के कारण होती हैं। यह विशेष रूप से 20-36 आयु वर्ग में होता है।
फर्मेंटेड खाद्य पाचन और लिवर के लिए बेहतर
डॉक्टरों ने बताया कि दही और इडली, ढोकला जैसे फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ पाचन और लिवर स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। गर्मी के मौसम में पारंपरिक के पेय जैसे छाछ और सत्तू शरीर को ठंडा रखने और लीवर को स्वस्थ रखने के विकल्प हैं।