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विदेशियों को लुभा रही हिंदी : कहीं हिंदी फिल्मों से प्रेरणा, किसी को रश्मिरथी पढ़ने की ललक

Thu, 03 Nov 2022 05:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

noida : देश ही नहीं दुनिया में अपना परचम लहराती हिंदी विदेशियों को खूब लुभा रही है। दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी  सीखने के प्रति ब्रिटेन के लोगों में ललक साफ दिखती है। वहां हिंदी सीखने वालों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ी है। 
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यूके हिंदी समिति से सदस्य पहुंचे सेक्टर 59 स्थित अमर उजाला कार्यालय... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश ही नहीं दुनिया में अपना परचम लहराती हिंदी विदेशियों को खूब लुभा रही है। दुनिया में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी  सीखने के प्रति ब्रिटेन के लोगों में ललक साफ दिखती है। वहां हिंदी सीखने वालों की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ी है। 

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यूके हिंदी समिति का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों भारत दौरे पर है। यह प्रतिनिधिमंडल बुधवार को सेक्टर 59 स्थित अमर उजाला कार्यालय पहुंचा और सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोगों ने कहा कि हिंदी फिल्मों से उन्हें प्रेरणा मिलती है। कइयों ने कहा कि उन्हें प्रेमचंद पसंद हैं तो कइयों को रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी खूब भाती है। 

ब्रिटेन के इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल ब्रिटेन के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बताया कि कैसे अलग-अलग कारणों से वे हिंदी सीखने के लिए प्रेरित हुए। कोई प्रेमचंद का उपन्यास पढ़ना चाहता है तो कोई बिना सबटाइटल के हिंदी फिल्मों और गीतों को समझना चाहता है। अमर उजाला दफ्तर में हिंदी कविताएं व हिंदी गीत सुनाते इन लोगों ने बताया कि यह भाषा उनके दिलों के बेहद करीब है। यूके हिंदी समिति की चेयरपर्सन सुरेखा ने कहा कि वह इस संस्था के जरिए भारतीय संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहती हैं। इसके लिए वह निरंतर प्रयासरत हैं। 
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यूके हिंदी समिति की सह चेयरपर्सन सीमा वेदी ने कहा कि ब्रिटेन में कई भाषाओं में प्रतियोगिताएं व प्रशिक्षण होते रहते हैं। लेकिन हिंदी के साथ ऐसा नहीं होना मुझे अखरता था। इसके बाद वहां की हिंदी सिखाने वाली संस्थाओं और लोगों से हमलोग जुड़े और एक पाठ्यक्रम तैयार किया। छह स्तरीय इस पाठ्यक्रम में लिखित, श्रवण, बोलचाल एवं प्रयोगात्मक स्तर पर कोर्स बंटा है। लोगों के लिए अलग-अलग तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। विजेताओं को भारत भ्रमण का मौका मिलता है। इस क्रम में यह दौरा आयोजित किया गया। काशी विश्वनाथ सहित कई स्थानों का भ्रमण करते हुए यह टीम नोएडा पहुंची है।

13 साल की धृति ने कहा, मैं 9 वर्ष की उम्र से हिंदी सीख रही हूं। मुझे हिंदी गाने सुनना बेहद पसंद है। वहीं, दुष्यंत के लिए ट और त का फर्क करना बेहद मुश्किल था  लेकिन बाद में वह सब समझ गए। प्रतिनिधिमंडल में शामिल अनीता गुप्ता, नफीसा शेख, हार्दिक, केर 
वििल्कंस , प्रणव भाटिया, वायलेटा ने भी अपने अनुभव साझा किए।

अगर तुम मिल जाओ... 
वेस्टइंडीज मूल के जमैल का चेहरा फिल्म जहर के गीत अगर तुम मिल जाओ जमाना छोड़ देंगे हम को गुनगुनाते हुए खासा चमक जाता है। वह कहते हैं, संगीत से प्यार ने उन्हें हिंदी सीखने के लिए प्रेरित किया ताकि बॉलीवुड गीतों को समझने में उन्हें कोई परेशानी ना आए। कालीदास के नाटकों पर अभिनय करने वाली आर्या बागमार एवं आर्या पटेल बताती हैं कि उन्हें उनके नाटक बेहद पसंद हैं। पूरे जोश के साथ रश्मिरथी की पंक्तियां सुनाते सेकेंडरी स्कूल के कृष्णमम आचार्य हिंदी सीखकर भारतीय संस्कृति को समझना चाहते हैं। यूके हिंदी समिति में कोषाध्यक्ष एवं शिक्षक नरेश वेदी ने कहा कि उच्चारण से लेकर शब्दकोष तक कई चुनौतियां इनके सामने हैं लेकिन धीरे धीरे मेहनत रास्ता आसान कर देती है।

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