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बिजली न मिलने से फसल सूखने की कगार पर

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पलवल। बैसलात के दर्जनों गांवों में बिजली कटौती किसानों के लिए दुखदायी साबित हो रही है। खेतों में सप्लाई की जाने वाली बिजली पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने से किसानों की फसल सूखने की कगार पर हैं। सबसे ज्यादा असर धान की फसल पर पड़ रहा है, क्योंकि धान की फसल में हर समय पानी रखना अनिवार्य है। बिजली कटौती समस्या को लेकर कई बार शिकायत की गई है, परंतु कोई सुनवाई नहीं पा रही है। किसानों का कहना है कि जल्द ही समस्या की शिकायत दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता से की जाएगी।
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दरअसल, बैसलात के गांव लुलवाड़ी सहित नांगल ब्राह्मण, रूंधी, लाडियाका, हिदायतपुर, बाता, बमाडियाका सहित अन्य गांवों में ज्यादातर किसान धान की फसल बोते हैं। नहरी क्षेत्र होने के कारण यहां धान की फसल बोने वाले किसान का ठीक गुजारा हो जाता है, परंतु इस बार रजवाहे सूखे हैं। इसलिए किसान फसलों की सिंचाई के लिए जमीन के पानी पर ही निर्भर है। इन गांवों में दीघोट फीडर बिजली सप्लाई की जाती है। नियमानुसार किसानों को प्रतिदिन आठ घंटे बिजली की आपूर्ति करनी होती है, परंतु किसानों को पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल रहा है। तय समय में बार-बार बिजली कट लगने से फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानों को केवल दो-तीन घंटे ही बिजली मिल रहा है।
बिजली के बार-बार कट लगने से फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसान नाका लगाता है तो आधे घंटे में बिजली चली जाती है। बिजली आने तक पहला पानी सूख जाता है।
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- शीशपाल, किसान लुलवाड़ी
सरकार किसान को सिंचाई के लिए रोजाना आठ घंटे बिजली देने का दावा करती है, परंतु दो-तीन घंटे ही बिजली मिल पा रही है। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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- धर्मबीर, किसान लुलवाड़ी
लाइन में फाल्ट आने से कई बार बिजली कटौती होती है। ज्यादातर बिजली सुचारू रूप से चलती है। कभी कोई दिक्कत आती है, उसे जल्द ही दूर कर दिया जाता है।
- अजाज अहमद, एसडीओ, बिजली निगम
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