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Noida News: पीड़ितों ने कहा... हमारे सामने गुनाह कबूला, फिर कैसे हुए रिहा

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निठारी कांंड: मामले में न्याय की आस में परिजन अब योगी-मोदी से लगाएंगे गुहार
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नोएडा। निठारी कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद आरोपी सुरेंद्र कोली को रिहा कर दिया गया है। इससे पहले इसी मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर भी बरी हो चुका है। बुधवार को कोली की जेल से रिहाई के बाद निठारी और आसपास के इलाके में फिर से दुख और गुस्से का माहौल है। परिजनों का कहना है कि हमारे सामने गुनाह कबूला, फिर कैसे हुए रिहा हो गया।

-पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला जैसे पुराने जख्मों को फिर से हरा कर गया है। 60 वर्षीय सुनीता देवी, जिनकी 10 साल की बेटी ज्योति 2006 में लापता हुई थी, आज भी अपनी बच्ची के लिए न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं। आंखों में आंसू लिए उन्होंने कहा कि हमारे सामने कोली और पंढेर ने गुनाह कबूला था, कोली ने खुद कहा था कि हां, मैंने बच्चों को मारा। फिर कैसे रिहा हो गए? अगर उन्होंने नहीं किया तो बताइए हमारी बच्ची को मारा किसने। हम गरीब लोग हैं, हमारी आवाज कोई नहीं सुनता। हमें लगता था कि अदालत हमें इंसाफ देगी, पर अब भगवान ही सहारा है। कोली और पंढेर ने पैसे और ताकत के बल पर खुद को छुड़ा लिया।
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पीड़ित परिवार लगाएगा सीएम-पीएम से गुहार : सुनीता अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि भगवान के घर देर है अंधेर नहीं। हमारी सरकार से बस इतनी गुहार है कि हमारे बच्चों को न्याय मिले। सुनीता ने बताया कि वह आज दो और पीड़ित परिवारों सेक्टर-122 के दुर्गा प्रसाद और निठारी के पप्पू यादव से मिली हैं। दुर्गा प्रसाद की सात साल की बेटी अर्चना और पप्पू यादव की बेटी भी इस हैवानियत की शिकार हुई थीं। तीनों परिवारों ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि अब वे सामूहिक रूप से दिल्ली और लखनऊ जाकर न्याय की मांग करेंगे।
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18 साल तक चली इंसाफ की लड़ाई, अब कानूनी रूप से बंद : जानकारी के अनुसार, साल 2005-2006 के दौरान नोएडा के निठारी गांव से अचानक कई बच्चे और महिलाएं रहस्यमय तरीके से लापता होने लगे। दिसंबर 2006 में पुलिस ने जब कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के घर की तलाशी ली, तो वहां से मानव हड्डियां और शरीर के अंग बरामद हुए। इस खुलासे के बाद मामला 2007 में सीबीआई को सौंपा गया, जहां पूछताछ के दौरान कोली ने कई बच्चों की हत्या करने की बात कबूल की थी। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्य कमजोर पाए जाने के आधार पर दोनों को 12 मामलों में बरी कर दिया। जुलाई 2025 में मोनिंदर सिंह पंढेर अंतिम मामले में बरी होकर जेल से बाहर आया, और अब नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को भी दोषमुक्त कर दिया। इस तरह लगभग दो दशक पुराने निठारी कांड का अध्याय अब कानूनी रूप से बंद हो गया है।
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