इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ मेट्रो कॉरिडोर के चार प्रमुख भूमिगत स्टेशनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू
-
12.3 किमी लंबा है कॉरिडोर
42 माह में पूरा होगा निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पुरानी और मध्य दिल्ली की सड़कों पर रोजाना लगने वाले जाम की तस्वीर बदलने की तैयारी है। जाम से छुटकारा दिलाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने फेज-चार के तहत नई भूमिगत लाइन पर निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ मेट्रो लाइन पुरानी दिल्ली, दिल्ली गेट, आईटीओ और सचिवालय जैसे सबसे अधिक दबाव वाले इलाकों को सीधे जोड़ेगी। लाइन के तैयार होने के बाद इन इलाकों में रोजाना सड़क पर उतरने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी और ट्रैफिक का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
यह लाइन कुल 12.3 किलोमीटर लंबी होगी जिसमें सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा वह 4 किलोमीटर लंबा भूमिगत सेक्शन है जहां चार बड़े स्टेशन न्यू दिल्ली, दिल्ली गेट, सचिवालय-आईजी स्टेडियम और इंद्रप्रस्थ बनाए जाएंगे। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए डीएमआरसी ने 42 महीने का लक्ष्य रखा है।
माना जा रहा है कि अगले साल फरवरी में निर्माण कार्य शुरू होगा। पुरानी दिल्ली में दिल्ली गेट, दरियागंज, लालकिला और कश्मीरी गेट के आसपास का क्षेत्र ट्रैफिक के मामले में सबसे ज्यादा दिक्कतों वाला है। यहां तंग सड़कों, बाजारों और सरकारी दफ्तरों की वजह से हर कुछ मिनट में जाम लगता है। ऊपर से पुरानी इमारतें और संकरी गलियों के कारण सड़क चौड़ीकरण भी आसान नहीं। ऐसे में भूमिगत मेट्रो ही एकमात्र विकल्प था जो भीड़ को जमीन के ऊपर से नीचे ले जा सके।
हर दूसरे स्टेशन पर मिलेगी इंटरचेंज की सुविधा
कॉरिडोर का 11.3 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत और केवल एक किलोमीटर का हिस्सा एलिवेटेड होगा। यह कॉरिडोर मौजूदा ग्रीन लाइन (बहादुरगढ़-इंद्रलोक-कीर्ति नगर) का विस्तार है। इसमें कुल 10 स्टेशन बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि हर दूसरे स्टेशन पर यात्रियों को इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी। इसमें इंद्रलोक, नबी करीम, नई दिल्ली, दिल्ली गेट और इंद्रप्रस्थ पर पांच इंटरचेंज होंगे। इससे मेट्रो की रेड, मजेंटा, येलो, वायलेट और ब्लू लाइनों से कनेक्टिविटी होगी।
दो समानांतर टनल का होगा निर्माण
निविदा दस्तावेज के मुताबिक, 4.7 किमी की दो समानांतर टनल शील्ड टीबीएम की मदद से बनेंगी। टीबीएम पुरानी दिल्ली, दिल्ली गेट, आईटीओ और संवेदनशील सरकारी भवनों के नीचे से होकर गुजरेगी, इसलिए ग्राउंड सेटलमेंट नियंत्रण, वाइब्रेशन मॉनिटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग अनिवार्य रखा गया है।