फिशिंग से लेकर यूपीआई फ्रॉड तक, इस युवा टीम ने एआई की ताकत से बनाया भारत को सुरक्षित रखने का इनोवेटिव समाधान
निशांत पटेल
नोएडा। शहर के युवा एक बार फिर देशभर में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। सेक्टर-62 स्थित जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (जेआईआईटी) के पूर्व छात्रों और वर्तमान विद्यार्थियों ने मिलकर स्टार्टअप एनफोल्ड एआई तैयार किया है। इस स्टार्टअप ने देश के प्रतिष्ठित साइबर सुरक्षा ग्रैंड चैलेंज 2.0 में जीत हासिल कर राष्ट्रीय मंच पर चमक बिखेरी है। यह प्रतियोगिता इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (डीएससीआई) द्वारा आयोजित की गई थी।
इस इनोवेटिव स्टार्टअप की स्थापना जेआईआईटी के 2008 बैच के पूर्व छात्र प्रखर गर्ग और मयंक तलवार ने की। इनके साथ अंतिम वर्ष के विद्यार्थी कृष्णा अग्रवाल, गर्वित मनराल और तनमय बुट्टा भी जुड़े। युवाओं की यह टीम देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों जैसे फिशिंग, पहचान चोरी, फेक ऐप्स, यूपीआई धोखाधड़ी के खिलाफ सबसे स्मार्ट और तेज एआई समाधान लेकर आई है।
साइबर सुरक्षा ग्रैंड चैलेंज के फाइनल राउंड में देशभर से चुनिंदा पांच स्टार्टअप स्किल्सडीए, सेफक्वांटा, जिरिज एआई, क्रिप्सिस और एनफोल्ड एआई को चुना गया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद एनफोल्ड एआई टॉप विजेता के रूप में उभरा। खतरे का पता लगाने और घटना प्रतिक्रिया के लिए एआई की श्रेणी में इसने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया और देश का सबसे बड़ा साइबर सुरक्षा अवॉर्ड जीता।
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क्या है एनफोल्ड एआई और क्यों है यह खास
आज भारत डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया में सबसे आगे है, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड की गति भी तेजी से बढ़ी है। एनफोल्ड एआई इसी चुनौती से निपटने के लिए तैयार किया गया है। इसके एआई टूल की प्रमुख विशेषताओं में रियल-टाइम एसएमएस थ्रेट डिटेक्शन, एक-क्लिक फ्रॉड रिपोर्टिंग, इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम और कम्युनिटी साइबर इंटेलिजेंस नेटवर्क शामिल हैं। जेआईआईटी इंजीनियरिंग विभाग की प्रमुख श्रेया कालरा ने इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।