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कोरोना और प्रदूषण से कोख में घुट रहा नए जीवन का दम

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नोएडा। प्रदूषण एवं कोरोना से लोगों को कई शारीरिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, अब मां की कोख में पल रहे शिशु पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। कोरोना गर्भवती महिलाओं को शारीरिक रूप से कमजोर करने के साथ अन्य समस्याएं पैदा कर रहा है। वहीं प्रदूषण का बढ़ता स्तर गर्भ में ही नए जीवन का दम घोंट रहा है। मां के जरिये गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच रहे प्रदूषण के कण विपरीत असर डाल रहे हैं। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल की डॉ. अलोकिता शर्मा ने बताया कि कोविड के कारण शारीरिक समस्याएं बढ़ी हैं। ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड समस्याएं लंबे समय तक प्रभावित करती हैं। इसका असर गर्भधारण के समय भी पड़ता है। साथ ही प्रदूषण का बढ़ता स्तर भी गर्भ के लिए नुकसानदायक है। प्रदूषण के कण महिला एवं गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इससे बचाव की आवश्यकता है। कोविड एवं प्रदूषण के कारण प्रीमैच्योर डिलीवरी के केस बढ़े हैं। समय से पहले बच्चे का जन्म, कमजोर शरीर और कम वजन की समस्याएं पहले से ज्यादा नजर आने लगी हैं। महिलाओं को गर्भावस्था में स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की आवश्यकता है।
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गर्भपात का भी बढ़ा खतरा
भंगेल सीएचसी की डॉ. मीरा पाठक ने बताया कि प्रदूषण एवं कोरोना को ध्यान में रखकर गर्भवती महिलाओं को एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। पहले हर माह हमारे अस्पताल में प्री-मैच्योर व कम वजन वाले बच्चों के जन्म संबंधी 10-11 केस आते थे। अब संख्या 17 तक पहुंच गई है। बच्चों को गर्भ में ही सांस संबंधी परेशानियां आने लगी हैं। इसका कारण प्रदूषण है, जो गर्भपात का खतरा भी बढ़ा देता है। वहीं, कोविड से प्रभावित शरीर महिलाओं के गर्भाशय एवं अन्य अंगों को कमजोर बना देता है। कई महिलाएं कोविड ए पॉजिटिव होती हैं, जो बीमारी से अनजान रहने के कारण उचित देखभाल भी नहीं करती हैं। कई ऐसी महिलाएं रहीं, जिन्होंने बीमारी की जांच नहीं करवाई। उनमें या तो लक्षण नजर नहीं आए या हल्के लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन शरीर पर इसका असर पड़ा। ऐसी महिलाओं को गर्भ से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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यह सावधानी बरतें
1- मास्क का प्रयोग अवश्य करें, यह कोविड एवं प्रदूषण से सुरक्षा में सहायक है।
2- चिकित्सक द्वारा निर्देशित सभी टेस्ट कराएं और समय से दवाएं लें।
3- पौष्टिक एवं संतुलित आहार लें। इस संबंध में चिकित्सक से परामर्श लें।
4- गर्भावस्था के दौरान बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
5- स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कत होने पर मनमानी दवाएं या उपायों से परहेज करें और चिकित्सक की सलाह लें।
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