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Noida News: भारतीय सांकेतिक भाषा से खुल रहे शिक्षा के नए द्वार

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- एनआईओएस में पांच वर्षों में कई गुना बढ़ा नामांकन, मूक-बधिर विद्यार्थियों को मिल रही नई पहचान
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नेहा शर्मा
नोएडा। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) विषय के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। मूक-बधिर शिक्षार्थियों के लिए यह विषय संवाद और शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध करा रहा है। यही वजह है कि पांच वर्ष पहले जहां इस विषय में केवल तीन विद्यार्थियों ने नामांकन कराया था, वहीं अब हर वर्ष सौ से अधिक छात्र-छात्राएं इसे चुन रहे हैं। एनआईओएस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में कक्षा 10 में भारतीय सांकेतिक भाषा विषय में मात्र तीन शिक्षार्थियों ने प्रवेश लिया था। वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 79 हो गई। इसके बाद 2023 में 109, वर्ष 2024 में 100 और 2025 में 105 विद्यार्थियों ने इस विषय को अपनाया। लगातार बढ़ता नामांकन इस बात का संकेत है कि श्रवण बाधित विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता और विश्वास बढ़ रहा है।
शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास-
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय सांकेतिक भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से मूक-बधिर शिक्षार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने और रोजगार के बेहतर अवसर हासिल करने में मदद मिल रही है। एनआईओएस की पहल ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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नामांकन का सफर-
वर्ष
नामांकन
2021
3
2022
79
2023
109
2024
100
2025
105
भारतीय सांकेतिक भाषा में बढ़ता नामांकन दर्शाता है कि श्रवण बाधित शिक्षार्थियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। हमारा उद्देश्य संवाद की बाधाओं को कम कर प्रत्येक शिक्षार्थी को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, ताकि कोई भी विद्यार्थी अपनी परिस्थितियों के कारण पीछे न रह जाए। -प्रो. अखिलेश मिश्र, अध्यक्ष, एनआईओएस
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