- बढ़ते खतरे पर एक दिवसीय बैठक में विशेषज्ञों ने रखी राय
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मानसून से पहले डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए देश और विदेश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उपचार और निदान में मौजूद गंभीर खामियों को दूर करने के लिए विशिष्ट उपचार की जरूरत पर बल दिया है। यह बैठक ड्रग्स फॉर नेग्लेक्टेड डिजीजेज इनिशिएटिव ने ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, डेंगू एलायंस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से आयोजित किया। इसमें सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर), नीति आयोग, विश्व बैंक और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया सहित कई प्रमुख संस्थान शामिल रहे। आईसीएमआर की वैज्ञानिक जी तरुणा मदन गुप्ता ने बताया कि देश में 10,000 से अधिक प्रतिभागियों के साथ स्वदेशी टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन का फेज-III परीक्षण चल रहा है। टीएचएसटीआई के कार्यकारी निदेशक प्रो. कार्तिकेयन ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए सुलभ और किफायती समाधान विकसित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉ. कैथरीना बोहेमे ने बताया कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लगभग 1.3 अरब लोग जोखिम में हैं। डेंगू एलायंस की सह-अध्यक्ष डॉ. नोर फरीजा नगाह ने कहा कि इस बीमारी से निपटने के लिए समेकित रणनीति जरूरी है, जिसमें टीकाकरण, वेक्टर नियंत्रण और प्रभावी उपचार तीनों पर समान ध्यान दिया जाए। बैठक में चार अलग-अलग पैनलों के जरिए 30 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया।