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सुबह और शाम... अपने दिल का रखें ख्याल

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नोएडा। कुछ समय पहले तक दिल से जुड़ी बीमारी के लिए अनुवांशिक कारकों को जिम्मेदार माना जाता था, लेकिन बदलती जीवनशैली ने इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा दिया है। दिल का दौरा पड़ने पर अस्पतालों में सुबह 6 से 10 बजे और शाम को 5 से 6 बजे के बीच 30 से 40 फीसदी मरीज पहुंचते हैं। इसकी वजह बॉयोलॉजिकल क्लॉक (शरीर की घड़ी) का बाधित होना है। सही समय पर सोने और संतुलित खानपान से हृदय रोग का खतरा कम किया जा सकता है। वर्ल्ड कांग्रेस ऑन क्रोनोमेडिसिन 2021 के सातवें संस्करण के तहत वार्षिक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली से बिगड़ रही सेहत पर चर्चा कर यह जानकारी दी।
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सम्मेलन के दूसरे दिन मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. पुरुषोत्तम लाल मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि कुछ समय में लोगों की जीवनशैली में बड़ा परिवर्तन आया है। इस कारण हृदय रोग के मरीज भी बढ़े हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, सही समय पर सोने से बीमारियों को दूर रखा जा सकता है। कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता ने कहा कि सुबह और रात में प्राकृतिक रूप से शरीर में बदलाव आते हैं। रात में सोने पर शरीर का रक्तचाप कम होता है। जबकि, सुबह उठने पर रक्तचाप बढ़ जाता है। दिन के मुकाबले सुबह शरीर का खून गाढ़ा होता है। ऐसे में रक्त धमनियां बाधित होने का खतरा होता है। जोखिम उन लोगों के लिए बढ़ जाता है, जिनकी दिनचर्या सही नहीं है। रात की शिफ्ट में काम करने वालों के अलावा देर रात तक जागने वाले तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) के संयुक्त सचिव डॉ. एस चक्रवर्ती ने कहा कि तमाम शोध बताते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए काम के तरीकों में बदलाव करना होगा। इसके लिए हमारी तरफ से मल्टीनेशनल कंपनियों व हेल्थ सेक्टर में जागरूकता अभियान चलाना जाएगा। आयोजन समिति के सचिव डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि रात की शिफ्ट में काम करने वालों के लिए ज्यादा वेतन का नियम लागू होना चाहिए। इससे संबंधित शोध एक अमेरिकी जनरल में प्रकाशित होने वाला है, इसके बाद देश-दुनिया में इस नियम को लागू कराने में मदद मिल सकेगी। इस मौके पर डॉ. कुलदीप धर, डॉ. मनीषा, डा.ॅ गुंजन मित्तल आदि ने अपनी राय रखी।
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