नूंह। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर महिलाओं के उत्थान के लिए भले ही बड़े-बड़े दावे किए जाते हों, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। इसका अंदाजा जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत सैकड़ों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लगाया जा सकता है, जिन्हें पिछले 4 माह से वेतन नहीं मिला है। इससे नाराज होकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को नूंह की पुरानी सब्जी मंडी के पास स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की।
आंगनबाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की जिला प्रधान रीटा धारीवाल, नीरज, बबीता, सविता, हेमा, गीता, आशा और रिहाना ने बताया कि नूंह खंड के सर्कल एक की कार्यकर्ताओं को 3 और सर्किल-दो की वर्करों को पिछले 4 महीने से वेतन नहीं मिला है। इस कारण उन्हें मजबूरन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वेतन नहीं मिलने से उनको अपने घरों का खर्चा वहन करना मुश्किल हो रहा है। कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार गुहार लगाने के बावजूद सुध नहीं ली जा रही है। जिला प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एक सप्ताह में वेतन देने का वादा किया है।
तावडू खंड में भी एक साल से नहीं मिला वेतन
जिले के तावडू खंड में भी एक साल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वेतन नहीं मिला है। सोमवार को नूंह और तावडू क्षेत्र की वर्करों ने सरकार और प्रशासन को नींद से जगाने के लिए एक दिन का सांकेतिक धरना दिया। मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना चलेगा।
सरकार ने मांगों पर नहीं किया अमल
जिले में बीते दिनों लगभग एक महीने तक चले धरने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगों में एरियर, भत्ता, ड्रेस, फंड, सीबीई, टीए और डीए के अलावा प्रमोशन व ईंधन के पैसे सहित अन्य मांगों को सरकार ने तुरंत पूरा कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार ने अब तक इन मांगों पर अमल नहीं किया है।
सर्व कर्मचारी संघ के नेतृत्व में प्रदर्शन की चेतावनी
आंगनबाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की जिला प्रधान रीटा धारीवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार गूंगी और बहरी हो चुकी है। बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग की महिलाओं को पूरी तरह से परेशान कर रही है। सरकार की गलत नीतियों के कारण महिलाएं धरना पर बैठने को मजबूर हैं। अगर जल्द मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो सर्व कर्मचारी संघ के नेतृत्व में सभी कर्मचारियों के साथ प्रदर्शन किया जाएगा।
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