राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यूपीपीसीबी और खनन विभाग से रिपोर्ट मांगी
लोनी में नदी के बीच बालू डालकर रोका बहाव, खुद की सुविधा के लिए बना दी धारा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। गाजियाबाद से नोएडा की तरफ से बहाव के बीच खनन माफिया ने यमुना नदी में अस्थायी बांध बना दिए। नदी का बहाव रोकने के लिए बालू और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया गया। अब इस मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और खनन विभाग से रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी में शिकायत की गई थी कि गाजियाबाद की लोनी तहसील के पंचायरा गांव में नदी में अवैध रूप से बालू का खनन किया जा रहा है। इसके लिए पर्यावरण की एनओसी भी नहीं ली गई है। इसके उलट हैवी मशीनों का उपयोग कर जगह-जगह बांध बना दिए हैं। इससे नदी की प्राकृतिक धारा ही बदल गई है।
खनन माफिया ने अपने लाभ के लिए एक कृत्रिम धारा बना दी है। इससे गांव वालों की जमीनों में भी पानी भर रहा है। नदी में किनारों पर कटान भी शुरू हो चुका है। खेती की जमीनों के अलावा नदी की बायोडायवर्सिटी भी इससे प्रभावित हो रही है। एनजीटी की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट में भी इसे सही पाया गया। एनजीटी ने आदेश किया है कि यूपीपीसीबी और खनन विभाग बताए कि क्या खनन के लिए जरूरी अनुमति ली गईं। चार सप्ताह में यूपीपीसीबी को इस मामले में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। वहीं एनजीटी इसमें अगली सुनवाई दो अगस्त को करेगा।