नगीना/पुन्हाना। मेवात विकास सभा सामाजिक संगठन की ओर से रविवार को नगीना में मेवात दिवस मनाया गया। इस मौके पर आयोजित समारोह में मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर की परपौत्र वधू समीना सुऐब खान बतौर मुख्यातिथि पहुंची जबकि गांधी ग्लोबल फैमिली के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम मोहन राय अतिथि के तौर पर पहुंचे। महात्मा गांधी ने गांव घासेडा में आकर 19 दिसंबर 1947 को लाखों मुस्लिम मेवातियों को पाकिस्तान जाने से रोका था।
इस मौके पर मेवात के उत्थान में बेहतरीन सामाजिक कार्य करने पर मरणोपरांत रतन लाल तंवर को मेवात रत्न, लेखूराम नंबरदार को सादल्ला अवार्ड और असमत खां व सुलेखा को मेवात गौरव के सम्मान से नवाजा गया।
इस मौके पर समीना ने कहा कि कुछ लोग मुगलों और मुसलमानों को बेवजह बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मुगलों ने हिंदुस्तान की शान को बढ़ाने का काम किया है। भारत को बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक इमारतें दी है। मुगलों के नाम पर बनी सड़क, संस्थान और उनके द्वारा बसाए गए शहरों के नाम बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि बदनाम करने और नाम बदलने से भारत का इतिहास नहीं बदल सकता। देश की आजादी में मेवात का बड़ा योगदान रहा है। बादशाह बहादुर शाह जफर के समय मेवातियों ने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। देश की आजादी में शहीद होने वाले उनके वारिसों को आजतक उनका हक नहीं मिला है।
गांधी ग्लोबल फैमिली के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम मोहन राय ने कहा कि मेवात का ऐसा कोई गांव नहीं है जिस घर से कोई न कोई देश की आजादी में शहीद नहीं हुआ हो। पाकिस्तान जाने के वक्त जो वादा महात्मा गांधी ने किया था उससे मेवाती महरूम हैं। उन्होंने ने कहा कि गुरुग्राम में नमाज पढ़ने से रोकने की घटना बताती है कि देश को फिर से 1947 को दौर में धकेला जा रहा है। देश की पहली आजादी में मेवात से करीब 10 हजार लोग शहीद हुए थे। इस मौके पर इतिहासकार सद्दीक मेव, उमर पाडला, इद्रीश कुरैशी साकरस, फजरूद्दीन बेसर, हाजी अलताफ, नसीम सरपंच सहित काफी प्रमुख लोग मौजूद रहे।