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एसआईटी जांच रिपोर्ट में सामने आ सकते हैं कई और नाम

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नोएडा। एमराल्ड कोर्ट मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में कई और नाम सामने आ सकते हैं। बुधवार देर शाम तक एसआईटी की टीम नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में जांच में जुटी रही। शासन की ओर से गठित चार सदस्यीय टीम को सात दिनों में जांच रिपोर्ट शासन को भेजनी है। इसकी मियाद आज खत्म हो रही है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की टीम ने प्राथमिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जांच करीब-करीब पूरी हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक बृहस्पतिवार सुबह कुछ देर के लिए टीम प्राधिकरण कार्यालय आएगी और इसके बाद दोपहर से पहले ही लौट जाएगी।
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सूत्रों का कहना है कि अभी एसआईटी को अपनी रिपोर्ट बनाने में एक-दो दिन लग सकते हैं। इसके बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद शासन की ओर से इस मामले में निर्देश दिए जाएंगे। इसमें एफआईआर के अलावा विभागीय जांच सहित दूसरे अन्य दोषियों को सामने लाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। इसके बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सूत्रों के अनुसारएसआईटी की टीम ने बीते तीन दिनों में प्राधिकरण की ओर से चिह्नित किए सात अधिकारियों की भूमिका की जांच के अलावा दूसरे पहलुओं से भी जांच की है। इसमें कई और नाम सामने आ सकते हैं, जिनकी भूमिका सुपरटेक के जमीन आवंटन, नक्शा पास करने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक संदिग्ध रही है। मामले में प्राधिकरण के एक अधिकारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। हालांकि यह भी जरूरी नहीं है कि जो नाम पहले चिह्नित किए गए हैं वह सभी दोषी हों।
एसआईटी की ओर से बीते तीन दिनों में नियोजन विभाग के क्रियाकलापों की गहनता से जांच की गई। इसमें प्राथमिक तौर पर कोर्ट के आदेश को वेरिफाई करने का काम किया जा रहा है। कोर्ट के फैसले के प्रस्तर (प्वाइंट)-143 में प्राधिकरण और बिल्डर की मिलीभगत की संभावनाओं की बात कही गई है। इसमें शामिल एक-एक बिंदुओं पर प्राधिकरण से कागजात मांगे गए हैं। एसआईटी जांच करने के लिए तीसरे दिन पहुंचे अधिकारियों में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के साथ-साथ नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल बतौर एसआईटी अध्यक्ष शामिल रहे। उनके साथ ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव शामिल रहे। इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ नेहा शर्मा और नियोजन विभाग के महाप्रबंधक इश्तियाक अहमद समय-समय पर जरूरत के हिसाब से सहयोग करते दिखे।
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इन जानकारियों के आधार पर हो रही जांच
एसआईटी की टीम ने यह नक्शा पास किए जाने की फाइलें खंगाली। तात्कालिक बिल्डिंग बायलॉज पर इनको परखा गया। यह देखा गया कि नक्शा पास करते समय कहां-कहां नियमों का उल्लंघन किया गया और प्राधिकरण के बोर्ड से क्या-क्या अनुमोदन हुआ। इसके बाद शासन की ओर से इसकी संस्तुति कब हुई। एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए की ओर से जब आरटीआई का जवाब मांगा गया तो प्राधिकरण ने टालमटोल किया था। यहां यह भी देखा गया कि बिल्डर ने लिखित में कागज देने से मना किया या फिर प्राधिकरण के स्तर पर इसे टाल दिया गया। गजट को लेकर भी जानकारी मांगी गई। इसे लागू करते समय पब्लिक से आपत्ति मांगी गई या नहीं। अगर आपत्ति आई तो इसका निस्तारण किया गया या नहीं। इन सभी बिंदुओं पर जांच की गई। खरीद योग्य एफएआर में नियमों का उल्लंघन तो नहीं किया गया। सुपरटेक के बिल्डिंग प्लान रिवाइज करते समय नियमों के तहत स्थानीय आरडब्ल्यूए को जानकारी दी गई कि नहीं। नियमों को वेरिफाई किया या नहीं।
पुलिस कमिश्नर के पहुंचने के बड़े मायने
गौतमबुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह बुधवार को सेक्टर-6 स्थित प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। यहां एसआईटी अध्यक्ष संजीव मित्तल और सीईओ रितु माहेश्वरी के साथ बैठक की। बैठक के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि पुलिस कमिश्नर ने इसे केवल औपचारिक मुलाकात बताया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि एसआईटी जांच के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर आदि कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका साबित होगी। वहीं दूसरी ओर जानकारों का यह भी कहना है कि किसानों के धरना प्रदर्शन और गिरफ्तारी की वजह से लॉ एंड ऑर्डर को लेकर वह संजीव मित्तल से बातचीत करने आए थे। संजीव मित्तल प्राधिकरण के चेयरमैन भी हैं। इस मामले में किसानों की गिरफ्तारी के बाद शासन तक बात पहुंच चुकी है।
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