- पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी के विला में वर्ष 2021 में चाकू से गला काटकर युवती की हुई थी हत्या
- पुलिस पर फायरिंग में भी 8 साल की सजा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र की पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी के विला में ट्रांसपोर्टर की बेटी पिंकी चौहान (28) की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने दिल्ली निवासी चमन चौहान उर्फ अर्जुन सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने हत्याकांड से जुड़े सामान की बरामदगी के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने के अलग मामले में भी उसे आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर कुल 1.30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट सोसाइटी के विला में कालू सिंह चौहान परिवार के साथ रहते हैं। 20 अक्तूबर 2021 को वह पत्नी और बेटे के साथ पैतृक गांव छलेरा गए थे। घर पर उनकी बेटी पिंकी अकेली थी। रात करीब 10 बजे परिवार लौटा तो दरवाजा नहीं खुला। दूसरी चाबी से ताला खोलकर परिजन अंदर पहुंचे तो बेडरूम में पिंकी खून से लथपथ मिली। उसकी गला रेतकर हत्या की गई थी। घर से नकदी, जेवर, चांदी का सामान और आईफोन 12 भी गायब था। इसके बाद सूरजपुर थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
जांच में पिंकी की चचेरी भाभी के भाई चमन चौहान का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिंकी से शादी करना चाहता था। उसे जब पता चला कि परिवार उसके लिए रिश्ता तलाश रहा है तो वह घर पहुंचा और पिंकी पर आभूषण लेकर साथ चलने का दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर उसने पिंकी की हत्या कर दी और सामान लेकर भाग गया।
चश्मदीद गवाह के बिना परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर टिका मामला
अभियोजन पक्ष ने हत्या के मामले में नौ गवाह पेश किए। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियों को अहम माना। सोसाइटी में रहने वाली रिश्तेदार रेनू चौहान ने गवाही दी कि उसने 20 अक्तूबर को आरोपी को पिंकी के घर से निकलते देखा था। उसने अदालत में उसकी पहचान भी की। सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज में एक युवक स्कूटी से आता-जाता दिखाई दिया था। रेनू और उसके पति बसंत ने फुटेज में दिख रहे युवक की पहचान चमन के रूप में की। पुलिस ने 22 अक्तूबर 2021 को चमन की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू, चांदी के गहने, नेपाली और अमेरिकी मुद्रा तथा पिंकी का आईफोन बरामद किया था। अदालत ने गवाही, सीसीटीवी फुटेज और बरामदगी सहित अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोषी करार दिया।
एफआईआर में देरी और फिंगरप्रिंट नहीं लेने की दलील खारिज
बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज कराने में करीब 18 घंटे की देरी और फिंगरप्रिंट नहीं लिए जाने सहित अन्य बिंदुओं पर सवाल उठाए। एडीजीसी अपराध नितिन कुमार त्यागी के मुताबिक, अदालत ने माना कि बेटी की हत्या के बाद परिवार का शोक में होना स्वाभाविक है, इसलिए एफआईआर में देरी को संदेह का आधार नहीं माना जा सकता। ताला नहीं टूटने संबंधी दलील पर भी अदालत ने विचार किया। अदालत के अनुसार, आरोपी रिश्तेदार था और उसका घर में आना-जाना था।
बरामदगी के दौरान पुलिस की पिस्टल छीनकर की थी फायरिंग
हत्याकांड से जुड़े सामान की बरामदगी के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग करने के मामले में भी अदालत ने चमन को दोषी ठहराया। अभियोजन के मुताबिक, 22 अक्तूबर 2021 को वरिष्ठ उपनिरीक्षक संतोष कुमार शुक्ला की टीम आरोपी को लेकर तिलपता गोल चक्कर से देवला की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर पहुंची थी। वहां पीर के पास झाड़ियों से बैग निकालकर आरोपी ने चाकू और लूट का सामान बरामद कराया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान चमन ने उपनिरीक्षक हरिराम सिंह की सरकारी पिस्टल छीन ली और भागते हुए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक गोली आरोपी के दाहिने घुटने के नीचे लगी। इसके बाद उसे पकड़ लिया गया। उसके पास से पिस्टल, मैगजीन और नौ कारतूस बरामद हुए थे। इस मामले में सूरजपुर थाने में हत्या के मुकदमे से अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पांच गवाह पेश किए। अदालत ने चमन को धारा-307 के तहत दोषी ठहराते हुए आठ साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।