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Noida News: फर्जीवाड़ा कर फाइनेंस कंपनी से 57 बार लिया लोन

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7.46 करोड़ का किया घपला, जांच जारी
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- कंपनी के ब्रांच मैनेजर से लेकर 15 आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज,

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। मन्नापुरम फाइनेंस कंपनी से 57 बार गलत तरीके से लोन लेकर 7.46 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। इसमें कंपनी के ब्रांच मैनेजर से लेकर अन्य कर्मचारियों के शामिल होने का आरोप है। इस मामले में कोतवाली सेक्टर-49 में ब्रांच मैनेजर समेत 15 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सेक्टर-51 स्थित होशियारपुर में मन्नापुरम फाइनेंस कंपनी की ब्रांच है। कंपनी प्रतिनिधि मुनाजिर हसन ने पुलिस से शिकायत दी है कि पिछले दिनों जब ऑडिट किया गया तब पता चला कि करीब साढ़े सात करोड़ रुपये की गड़बड़ी है। इसके बाद कंपनी की तरफ से आंतरिक जांच कराई गई, तब पता चला कि फरवरी 2023 से अगस्त 2025 तक फर्जी कागजातों पर 57 अलग-अलग लोन कराए गए हैं। इसमें कंपनी के कुछ कर्मी, एजेंट और डीलरों ने मिलकर दो फर्म और लोगों के नाम पर फर्जी कागजात लगाकर लोन लिए हैं। लोन लेने के लिए लगाए गए केवाईसी, फोन नंबर व पते फर्जी हैं। इससे शाखा कार्यालय को 7.46 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।
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इन पर दर्ज हुई प्राथमिकी
प्रतिनिधि ने शाखा प्रबंधक श्रीप्रकाश, सेल्स हेड शुभेंद्र यादव, कर्मी दिव्यांशु बिश्नोई, अंकित कुमार, आलोक कुमार, नीतीश सक्सेना, विनय कुमार, विकास कुमार, एजेंट विजय खारी, गौरव जैन, प्रदीप कुमार, लोनधारक राज उर्फ राजू चौधरी, हरेंद्र कुमार, बीएम आटो सेल्स व ओरियन मोटर्स कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। एडीसीपी शैव्या गोयल का कहना है कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे की जांच की जा रही है।

फर्जी दस्तावेज पर कराया गया फर्जी लोन : पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला कि दस्तावेजों पर महंगी कार के लिए फर्जी लोन कराया जा रहा था। लोन हो जाने के बाद आरोपी रकम रख लेते थे। इसके बाद शोरूम के कर्मचारियों व एजेंट मिलकर सामान्य मॉडल की कार निकालकर दूसरे को बेच दिया करते थे। कार का रजिस्ट्रेशन भी अस्थायी कराते थे। आरोपी कार लोन करने के बाद शुरू की दो-तीन किस्त जमा कर दिया करते थे। पुलिस कार शो रूम व उसके कर्मचारियों के बारे में भी पता लगा रही है।
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ऐसे चल रहा था फर्जीवाड़ा : इस फर्जीवाड़े के खेल में मन्नापुरम फाइनेंस कंपनी के मैनेजर, कर्मचारी, कार शो रूम के अधिकारी, एजेंट सभी लोग मिले हुए थे। ये लोग फर्जी दस्तावेज या कुछ ऐसे लोगों के नाम पर भी लोन लेते थे। जो कम पढ़े लिखे थे। ऐसे लोगों को 50 हजार रुपये देते थे। कार शो रूम से भी गलत तरीके से कारों की खरीद फरोख्त करते थे। ये आरोपी लोन का भी गबन करते थे।










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