आम्रपाली के निर्माणाधीन प्रोजक्ट की साइट पर बड़ी तादाद में मजदूर परिवार के साथ रहते हैं। निर्माण कार्य जारी रहने तक वह परिसर को ही आशियाना बनाकर गुजारा करते हैं। शुक्रवार सुबह हादसे की आवाज सुनते ही सैंकड़ों मजदूर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। मजदूर अभी हादसे के गम से उबरे भी नहीं थे कि पुलिस ने प्रोजेक्ट खाली करने की घोषणा कर दी। इससे लगभग आठ हजार लोगों के आगे छत और रोजगार का संकट खड़ा हो गया।
निर्माणाधीन प्रोजेक्ट एक बड़े क्षेत्र में फैला है। बारिश के कारण जलभराव व गीली मिट्टी से रास्ता भी खराब हो गया है। निर्माण चलने के कारण सरिया व अन्य निर्माण सामग्री भी इधर-उधर रखी हुई है। प्रोजेक्ट में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में काफी समय भी लगता है और परेशानी भी होती है। लेकिन हादसा होने के बाद पहले हादसा स्थल के आसपास रहने वाले मजदूर मौके पर पहुंच गए। अधिकांश महिलाएं व बच्चे अलग-अलग मंजिल पर खड़े होकर दर्द का मंजर देख रहे थे। कुछ देर बाद ही दूसरे टॉवर व ब्लॉक में रहने वाले मजदूर भी मौके पर पहुंच गए। अपने साथी मजदूरों को तड़पते देख वे दर्द से सहम गए। कई मजदूरों ने कंपनी के कर्मचारियों की घायल मजदूरों को लिफ्ट से बाहर निकालने में मदद की।
हादसे की वजह पता नहीं होने के कारण कई मजदूर डरे
कई मजदूर ऐसे भी थे। जो हादसे के बाद भी डर के कारण काफी देर तक घटना स्थल पर नहीं पहुंचे। उनका कहना था कि उन्हें नहीं पता था कि लिफ्ट गिरी है। इनमें कई को लगा कि इमारत गिरने से हादसा हुआ है। इसलिए वह घटनास्थल तक जाने में बचते रहे। हालांकि बाद में लिफ्ट गिरने से हादसे की बात पता चलने पर वह तुरंत मौके पर पहुंच गए।
ठेकेदार के पास है पैसा, न घर है और न रोजगार, जाएं कहां
महिला मजदूर विमला ने बताया कि उनका पूरा परिवार साइट पर काम कर रहा है। ठेकेदार ने कई दिनों की मजदूरी नहीं दी है। उनके बच्चे भी साथ रहते हैं। वह बिहार से यहां ठेकेदार के नीचे काम करने वाले सुपरवाइजर के कहने पर काम कर रहे हैं। अधिकारी सभी को प्रोजेक्ट खाली करने के लिए कह रहे हैं। ऐसे में उसके सामने संकट खड़ा हो गया है। उसे पता नहीं कि वह कहां जाएगी। उनका मजदूरी का बकाया रुपया मिलेगा या नहीं।